व्यध
व्यध्
व्यधिकरण
व्यधिकरणम् [वि+अधि+कृ+ल्युट्]
भिन्न आधार या स्तर पर जीवित रहना (जैसा कि 'व्यधिकरण बहुब्रीहि' में), अर्थात् वह बहुव्रीहि समास जहाँ पहला पद दूसरे पद से नितान्त भिन्न कारक का हो, यदि उनका विग्रह करके देखा जाय – उदा० चक्रपाणिः चन्द्रमौलि: आदि ।