व्यष्टि (स्त्री०) [वि+अश्+क्तिन्]
1. वैयक्तिकता, एकाकीपन2. वितरणशील फैलाव3. (वेदान्त० में) समष्टि को उसके पृथक्–पृथक् अवयवों के रूप में देखना, एक अंश (विप० समष्टि) ।