व्याजिह्म (वि०) [वि+हा+मन्, द्वित्वादि नि०]
कुटिल, तोड़ा–मरोड़ा हुआ, झुका हुआ धूमपटलव्याजिह्मरत्नत्विषः –नाग० ५।१७।
परिशिष्ट