संस्कृत-शब्दकोशः

व्रजभाषा व्रज्या

व्रज्

व्रज् (भ्वा० पर० व्रजति)
1. जाना, चलना, प्रगति करना, –नाविनीतर्व्रजद् धुर्यैः –मनु० ४।६७
2. पधारना, पहुँचना, दर्शन करना –मामेकं शरणं व्रज –भग० १८।६६
3. बिदा होना, सेवा से निवृत्त होना, पीछे हटना
4. (समय का) बीतना –इयं व्रजति यामिनी त्यज नरेन्द्र निद्रारसम् –विक्रम० ११।७४, (यह धातु प्रायः गम् या या धातु की भाँति प्रयुक्त होती है),
अनु–
1. बाद में जाना, अनुगमन करना –मनु० ११।१११ –कु० ७।३८
2. अभ्यास करना, सम्पन्न करना
3. सहारा लेना,
आ–
आना, पहुँचना,
परि–
भिक्षु या साधु के रूप में इधर–उधर घूमना, संन्यासी या परिव्राजक हो जाना,
प्र–
1. निर्वासित होना
2. सांसारिक वासनाओं को छोड़ देना, चौथे आश्रम में प्रविष्ट होना, अर्थात् संन्यासी हो जाना –मनु० ६।३८, ८।३६३ ।



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