शकन् (नपुं०) मल, विष्ठा, विशेषकर जानवरों का मल, लीद गोबर आदि (इस शब्द के पहले पाँच वचनों में कोई रूप नहीं होता, कर्म० द्वि० व० से आगे विकल्प से 'शकृत्' आदेश हो जाता है) ।