शंकर वेदान्त दर्शन का प्रसिद्ध आचार्य, तथा शारीरिक भाष्य का प्रणेता । इसके अतिरिक्त वेदान्त विषय पर इसकी अनेक रचनाएँ है । कहते हैं कि यह ७८८ ई० में उत्पन्न हुआ और ३२ वर्ष की थोडी आयु में ही ८२० ई० में परलोकवासी हुआ । परन्तु कुछ विद्वान् लोगों (तैलंग महाशय तथा डाक्टर भंडारकर आदि) ने यह दर्शन का प्रयत्न किया है कि यह छठी या सातवीं शताब्दी में हुआ होगा । मुद्राराक्षस की प्रस्तावना देखिये ।
शङ्कर (वि०) (स्त्री० –‘रा’, –‘री’) [शं सुखं करोति –कृ+अच्]
आनन्द या समृद्धि देने वाला, शुभ, मङ्गलमय,
~रः
1. शिव
2. विख्यात आचार्य और ग्रन्थप्रणेता शंकराचार्य –दे० परि० २,
~री
1. शिव की पत्नी पार्वती
2. मंजिष्ठा, मजीठ
3. शमीवृक्ष ।