शिखण्डिन् (वि०) [शिखण्डोऽस्त्यस्य इनि]
कलगीदार, शिखाधारी. (पुं०)
1. मोर–नदति स एष वधूसखः शिखण्डी–उत्तर० ३।१८, रघु० १।३९, कु० १।१५
2. मुर्गा
3. बाण
4. मोर की पूँछ
5. एक प्रकार की चमेली
6. विष्णु
7. द्रुपद के एक पुत्र का नाम (शिखण्डी मूलरूप से स्त्री था, क्योंकि अंबा ने भीष्म से बदला चुकाने के लिए द्रुपद के घर जन्म लिया (दे० अंबा) । परन्तु जन्म से ही उस कन्या की पुत्ररूप में घोषणा की गई और पुत्र की भांति ही उसकी शिक्षा-दीक्षा हुई । समय पाकर उसका विवाह हिरण्यवर्मा की पुत्री से हुआ, परन्तु जब हिरण्यवर्मा को ज्ञात हुआ कि मेरा जामाता तो सचमुच स्त्री है तो उसे बड़ा दुःख हुआ, इसलिए उसने इस धोखा दिये जाने के कारण द्रुपद की राजधानी पर चढाई करने की सोची परन्तु शिखंडी ने एक जंगल में रह कर घोर तपस्या की, और किसी उपाय से उसने अपना स्त्रीत्व यक्ष को देकर उसका पुरुषत्व बदले में प्राप्त किया और इस प्रकार द्रुपद के ऊपर आए हुए संकट को टाला । बाद में महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह को मारने का एक साधन बना । जब अर्जुन ने शिखंडी को अपने योद्धा के रूप में आगे कर दिया तो भीष्म पितामह ने स्त्री के साथ युद्ध करने से हाथ खींच लिया । बाद में अश्वत्थामा ने शिखंडी को मार डाला) ।