शीघ्र (वि०) [शिङ्घ्+रक्, नि०]
फुर्तीला, त्वरित, सत्वर–विबभ्रन्मणिं मण्डलचारशीघ्रः–विक्रम० ५।२
~घ्रः
(ज्योति० में) ग्रहयोग,
~घ्रम्
(अव्य०) फुर्ती से, तेज़ी से, जल्दी से ।
समस्त पद
~उच्चः
(ज्योति० में) ग्रहयोग,
~कारिन्
(वि०) फुर्तीला, चुस्त,
~कोपिन्
(वि०) चिड़चिड़ा, क्रोधी,
~चेतनः
कुत्ता,
~बुद्धि
(वि०) तीक्ष्णबुद्धि वाला, तेज बुद्धिवाला,
~लङ्घन
(वि०) तेज़ जाने वाला, पैर फुर्ती से रखने वाला–घट० ८,
~वेधिन्
(पुं०) तेज़ धनुर्धर ।