शीत (वि०) [श्यै+क्त]
1. ठण्डा, शीतल, जमा हुआ, –तब कुसुमशरत्वं शीतरश्मित्वमिन्दोः–श० ३।२
2. मन्द, सुस्त, उदासीन, आलसी
3. अलस, सुस्त, जड़,
~तः
1. एक प्रकार का नरकुल
2. नील का वृक्ष
3. जाड़े की ऋतु, (नपुं० भी)
4. कपूर,
~तम्
1. ठण्डक, शीतलता, सर्दी –आः शीतं तुहिनाचलस्य करयो:–काव्य० १०2. जल
3. दारचीनी ।
समस्त पद
~अंशुः
1. चांद – वक्त्रेन्द्रौ तव सत्ययं यदपरः शीतांशुरुज्जम्भते – काव्य० १०
2. कपूर,
~अदः
मसूड़ों के पकजाने या उनमें व्रण हो जाने का रोग, पायरिया,
~अद्रिः
हिमालय पहाड,
~अश्मन्
(पुं०) चन्द्रकान्तमणि,
~आर्त
(वि०) ठंड से व्याकुल, जाड़े से ठिठुरा हुआ,
~उत्तमम्
पानी,
~कालः
जाड़े की ऋतु, सर्दी का मौसम,
~कालीन
(वि०) जाड़े में होने वाला,
~कृच्छ्रः, –च्छ्रम्
एक प्रकार की धार्मिक साधना,
~गन्धम्
सफेद चन्दन,
~गुः
1. चाँद
2. कपूर,
~चम्पकः
1. दीपक
2. दर्पण,
~दीधिति:
चाँद,
~पुष्पः
शिरीष का वृक्ष, शिरस का पेड़,
~पुष्पकम्
शैलेय गन्धद्रव्य,
~प्रभः
कपूर,
~भानुः
चाँद,
~भीरुः
एक प्रकार की मल्लिका,
~मयूखः, ~मरीचिः, ~रश्मिः
1. चाँद
2. कपूर,
~रम्यः
दीपक,
~रुच्
(पुं०) चाँद,
~वल्कः
गूलर का पेड़,
~वीर्यक:
बड़ का पेड़,
~शिवः
शमीवृक्ष, जैंडी का पेड़,
(–वम्)
1. सेंधा नमक
2. सुहागा,
~शूकः
जौ,
~स्पर्श
(वि०) ठंडक पहुँचाने वाला ।