शुक्रः [शुच्+रक्, नि० कुत्वम्]
1. शुक्रग्रह
2. राक्षसों के गुरु जिसने अपने जादू के मंत्रों से युद्ध में मरे हुए राक्षसों को पुनर्जीवित कर दिया था – दे० 'कच', 'देवयानी' और 'ययाति'
3. ज्येष्ठमास
4. अग्नि,
~क्रम्
1. वीर्य–पुमान् पुंसोऽधिके शुक्रे स्त्री भवत्यधिके स्त्रियाः – मनु० ३।६९, ५।६३
2. किसी भा वस्तु का सत् ।
समस्त पद
~अङ्गः
मोर,
~कर
(वि०) शुक्र या वीर्य सम्बन्धी,
(–रः)
हड्डियों में रहने वाली मज्जा,
~वारः, ~वासरः
भृगुवार, जुमा
~शिष्यः
राक्षस ।
शुक्रम् [शुच्+रक्, नि० कुत्वम्]
1. उज्ज्वलता
2. सोना दौलत
3. वीर्य
4. किसी चीज का सत्
5. पुंस्त्वशक्ति, स्त्रीत्वशक्ति ।
समस्त पद
~कृच्छ्रम्
मूत्रकृच्छ्र रोग,
~दोषः
बीर्य का दोष ।
परिशिष्ट