संस्कृत-शब्दकोशः

शुर् शुल्काध्यक्ष

शुल्क

शुल्क (पुं०/नपुं०) [शुल्क्+घञ्]


1. चुंगी, कर, महसूल, सीमाशुल्क, विशेषतः वह कर जो राज्यद्वारा घाट या मार्ग आदि पर लिया जाता है–कः सुधीः संत्यजेद्भाण्डं शुल्कस्यैवातिसाध्वसात्–हि० ३।१२५, मनु० ८।१५९, याज्ञ० २।४७
2. किसी सौदे को पक्का करने के लिये दिया गया अगाऊ धन
3. (कन्या का) विक्रय मूल्य, कन्या के पिता को कन्या के बदले दिया गया धन – पीडितो दुहितृशुल्कसंस्थया–रघु० १।४७, न कन्यायाः पिता विद्वान् गृह्णीयाच्छुल्कमण्वपि –मनु० ३।५१, ८।२०४, ९।९३, ९८
4. विवाहोपहार
5. विवाह निश्चित करने के लिए दिया गया धन, दहेज
6. वर पक्ष की ओर से दुलहिन को दिया गया उपहार ।
समस्त पद
~ग्राहक, ~ग्राहिन्
(वि०) शुल्कसंग्रहकर्ता,
~दः
1. विवाहोपहार देने वाला
2. वाग्दत्त विवाहार्थी,
~शाला, ~स्थानम्
शुल्क जमा करने की जगह, चुंगीघर ।



Correction: