शूर्प (पुं०/नपुं०) [शृ+पः ऊश्च नित्]
छाज,
~र्पः
दो द्रोण का तोल ।
समस्त पद
~कर्णः
हाथी,
~णखा, –खी
(नखा के स्थान पर) जिसके नख छाज जैसे लंबे चौड़े हों, रावण की बहन का नाम (वह राम के सौन्दर्य पर मुग्ध होकर उनसे विवाह करने की प्रार्थना करने लगी । परन्तु राम ने कहा कि मेरे साथ तो मेरी पत्नी है, अच्छा हो कि तुम लक्ष्मण के पास जाओ । परन्तु जब लक्ष्मण ने भी उसकी प्रार्थना न मानी तो वह वापिस राम के पास आई । इस बात पर सीता को हंसी आ गई । फलतः शूर्पणखा ने अपने आपको अत्यधिक अपमानित समझकर बदला लेने की इच्छा से भीषण रूप धारण किया और सीता को खाने के लिए दौड़ी । परन्तु उसी समय लक्ष्मण ने उसके कान और नाक काटली और उसका रूप विगाड़ दिया –रघु० १२।३२-४०),
~वातः
छाज को हिलाने से उत्पन्न हवा
~श्रुतिः
हाथी ।