शृ ( क्र्या० पर० श्रृणाति, शीर्ण)
1. फाड़ डालना, टुकड़े टुकडे कर डालना
2. चोट पहुँचाना, क्षति ग्रस्त करना
3. मार डालना, नष्ट करना –कि० १४।१३, कर्मवा० (शोर्यते)
1. चिथडे-चिथड़े होना, कुम्हलाना, मुरझाना, बर्बाद होना,
अव–
जबरन ले भागना (कर्मवा०) मुर्झाना, कुम्हलाना–मूर्ध्नि वा सर्वलोकस्य विशीर्येत वनेऽथवा–भर्तृ० २।१०४ ।