संस्कृत-शब्दकोशः

श्रेणी श्रेयोभिकाङ्क्षिन्

श्रेयस्

श्रेयस् (वि०) [अतिशयेन प्रशस्यम्–ईयसुन्, श्रादेशः]


1. अपेक्षाकृत अच्छा, वरीयस्, श्रेष्ठतर, –वर्धनाद्रक्षणं श्रेय:– हि० ३।३, भग० ३।३५, २।५
2. सर्वोत्तम, श्रेष्ठतम
3. अधिक सुखी या सौभाग्यशाली
4. अधिक आनन्ददायक, प्रियतर (पुं०)
1. सद्गुण, पुण्यकर्म, नैतिक गुण, धार्मिक गुण
2. आनन्द, सौभाग्य, मंगल, शुभ, कल्याण, आशीर्वाद, शुभ परिणाम–पूर्वावधीरितं श्रेयो दुःखं हि परिवर्तते –श० ७।१३, प्रतिबघ्नाति हि श्रेयः पूज्यपूजाव्यतिक्रमः–रघु० १।७९, उत्तर० ५।२७, ७।२०, रघु० ५।३४
3. शुभ अवसर –श० ७
4. मोक्ष, मुक्ति ।
समस्त पद
~अर्थिन्
(वि०)
1. आनन्द का अन्वेषक, आनन्द का इच्छुक
2. हितैषी
~कर
1. आनन्दप्रद, अनुकूल
2. मंगलमय, शुभ,
~परिश्रमः
मुक्ति प्राप्त करने की चेष्टा ।



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