संस्कृत-शब्दकोशः

श्वसुरगृह श्वस्तन

श्वस्

श्वस् (अदा० परत श्वसिति, स्वस्त-श्वसित)
1. साँस लेना, सांस निकालना, सांस खींचना –स कर्मकारभस्त्रेव श्वसन्नपि न जीवति –हि० २।११, रघु० ८।८७
2. आह भरना, हाँपना, ऊँचा सांस लेना, –श्वसिति विहगवर्ग: –ऋतु० १।१३
3. फूत्कार करना, खुर्रांटे भरना, प्रेर०–(श्वासयति-ते) सांस दिलाना, जीवित रखना,
आ–
1. सांस लेना, महावीर० ५।५१,
2. सांस लेने लगना, साहसी बनना, हिम्मत करना –मेघ० ८
3. पुनर्जीवित करना –भट्टि० ९।५६, (प्रेर०) सांत्वना देना, आराम देना, प्रसन्न करना,
उद्–
1. सांस देना, जीना –वेणी० ५।१५, मनु ३।७२
2. उत्साह बढाना, जी उठना, हिम्मत बाँधना –कि० ३।८, शि० १८।५८
3. खुलना, खिलना, (जैसे कमल का) –शि० १०।५८, ११।१५
4. हांपना, गहरा सांस लेना–भट्टि० ६।१२०, १४।५५
5. ऊँचा सांस लेना, धड़कना
6. उन्मुक्त होना,
नि–, निस्–
आह भरना, ऊँचा साँस लेना,
वि–
विश्वास करना, भरोसा करना, विश्वास रखना (प्रायः अधि० के साथ)–पुंसि विश्वसिति कुत्र कुमारी–नै० ५।११० –कु०५।१५, (कभी कभी संबं० के साथ)
2. सुरक्षित रहना, निर्भय या विश्वस्त होना–विशश्वसे पक्षिगणैः समन्तात्– भट्टि० ८।१०५,
समा–
साहसी होना, हिम्मत बांधना, ढाढस रखना (प्रेर०) सांत्वना देना, प्रोत्साहित करना, उत्साह बढ़ाना ।


श्वस् (अव्य) [आगामि अहः पृषो०]


1. आने वाला कल,–वरमद्य कपोतो न श्वो मयूर:–सुभा०
2. भविष्यत्काल (समास के आरंभ में) ।
समस्त पद
~भूत
(वि०) (‘श्वोभूत’) कल होने वाला,
~वसीय, ~वसीयस्
(‘श्वोवसीय’, ‘श्वोवसीयस्’) (वि०) प्रसन्न, शुभ, भाग्यशाली, (नपुं०) प्रसन्नता, सौभाग्य,
~श्रेयस्
(‘श्वः श्रेयस्’) (वि०) प्रसन्न, समृद्धि,
(–सम्)
1. प्रसन्नता, समृद्धि
2. ब्रह्मा या परमात्मा का विशेषण ।



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