संस्कृत-शब्दकोशः

शूल शूलगव

शूलक

शूलकः (पुंलिङ्ग)


निष्पत्ति− "कन्" (५-३-९७)
व्युत्पत्ति− शूल इव
विस्तार− "विनीतस्तु साधुवाहो दुर्वीनतस्तु शूलकः" - हेम०

अर्थ−
१. झस्कने घोडा / झस्काहा घोडा,
२. प्राचीन एक ऋषि ।



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