मृज्
i (भ्वा० पर० मार्जति) शब्द करना ।
ii(अदा० पर०, चुरा० उभ० मार्ष्टि, मार्जयति–ते, इच्छा०मिमृक्षति या मिमार्जिषति)
1. पोंछना, धो डालना, स्वच्छ करना, साफ करना
2. बुहारी देकर साफ करना (आलं० से भी) स्वेदलवान्ममार्ज–शि० ३।७९
3. चिकना करना, (घोड़े आदि को) खरहरे से रगड़ना
4. सजाना, अलंकृत करना
5. निर्मल करना, पानी से धोना, साफ़ करना–ललुः खड्गान्ममार्जुश्च ममृजुश्च परश्वधान् –भट्टि० १४।९२, (शुद्धान् चक्रुः या शोधितवन्तः),
अव–
1. मलना. गुदगुदाना
2. धो डालना,
उद्–
पोंछ देना, हटाना,–रघु० १५।३२,
निस्–
पोंछना, धो देना,
परि–
पोंछ डालना, धो देना, हटाना–(वाच्यं) त्यागेन पत्न्याः परिमार्ष्टुमैच्छत्–रघु० १४।३४
2. मलना, गुदगुदाना,
प्र–
पोंछ डालना, हटाना, प्रायश्चित्त करना –स्वभावलोलेत्य यशः प्रमृष्टम् – रघु० ६।३१, प्रणिपातलङ्घनं प्रमार्ष्टुकामा –विक्रम० ३, मालवि० ४,
वि–
1. पोंछ डालना, पोंछ देना
2. निर्मल करना, स्वच्छ करना
सम्–
1. बुहार कर साफ करना, निर्मल करना
2. पोंछ देना, पोंछ डालना, हटाना
3. मलना, गुदगुदाना
4. निचोड़ना, छानना ।