मृत (भू० क० कृ०) [मृ+क्त]
1. मरा हुआ, मृत्यु को को प्राप्त
2. मृतक जैसा, व्यर्थ, निष्फल मृतो दरिद्रः पुरुषो मृतं मैथुनमप्रजम्, मृतमश्रोत्रियं श्राद्धं मृतो यज्ञस्त्वदक्षिणः–पंच० २।९४
3. भस्म किया हुआ, फूँका हुआ–मूर्च्छा गतो मृतो वा निदर्शनं पारदोऽत्र रसः –भामि० १।८२,
~तम्
1. मृत्यु
2. भिक्षा में प्राप्त अन्न, दान या भिक्षा–दे० अमृतम् (८) ।
समस्त पद
~अङ्गम्
शव,
~अण्डः
सूर्य,
~अशौचम्
किसी संबंधी की मृत्यु से उत्पन्न अपवित्रता, अशौच, दे० 'अशौच',
~उद्भवः
समुद्र, सागर,
~कल्प
(वि०) मृतप्राय, बेहोश,
~गृहम्
कबर,
~दारः
रंडवा, विधुर,
~निर्यातकः
जो शवों को कब्रिस्तान में ढोकर ले जाता है,
~मत्तः, ~मत्तकः
गीदड़,
~संस्कारः
अन्त्येष्टि या और्ध्वदेहिक कृत्य,
~संजीवन
(वि०) मुर्दों को जिलाने वाला
(–नम्, –नी)
मुर्दों का पुनर्जीवित करना,
(–नी)
मुर्दों को जिलाने का मंत्र, गंडा या ताबीज,
~सूतकम्
मरे हुए (मृत जात) बच्चे को जन्म देना,
~स्नानम्
किसी की मृत्यु होने पर स्नान करना ।