मृतकः [मृत+कन्]
मुर्दा शव ध्रुवं ते जीवन्तोऽप्यहह मृतका मन्दमतयो, न येषामानन्दं जनयति जगन्नाथभणिति:–भामि० ४।१९,
~कम्
किसी संबंधी की मृत्यु हो जाने पर उत्पन्न अशौच ।
समस्त पद
~अंतकः
गीदड़ ।
मृतकम् [मृत+कन्]
मुर्दा शव ध्रुवं ते जीवन्तोऽप्यहह मृतका मन्दमतयो, न येषामानन्दं जनयति जगन्नाथभणिति:–भामि० ४।१९,
~कम्
किसी संबंधी की मृत्यु हो जाने पर उत्पन्न अशौच ।
समस्त पद
~अंतकः
गीदड़ ।