मृष्
i (भ्वा० पर० मर्षति) छिड़कना
ii (भ्वा० उभ० मर्षति–ते) बर्दाश्त करना, सहन करना–आदि (प्राय: दिवा० उभ०)
iii (दिवा०, चुरा० उभ०–मृष्यति–ते, मर्षयति–ते, मर्षित)
1. झेलना, भोगना, सहन करना, साथ रहना –तत्किमिदमकार्यमनुष्ठितं दैवेन, लोको न मृष्यतीति–उत्तर० ३ रघु० ९।६२
2. अनुमति देना, इजाजत देना
3. क्षमा करना, माफ करना, दोषमुक्त करना, क्षमाशील होना–मृष्यन्तु लवस्य बालिशतां तातपादाः–उत्तर० ६, प्रथममिति प्रेक्ष्य दुहितृजनस्यैकोऽपराधो भगवता मर्षयितव्यः–श० ४, आर्य मर्षय मर्षय–वेणी० १, महाब्राह्मण मर्षय –मृच्छ० १ ।