मौर्वी [मूर्वाया विकार: अण् + ङीप्]
1. धनुष की डोरी –मौर्वीकिणाङ्को भुजः– श० १।१३, मौर्वी धनुषि चातता– रघु० १।१९, १८।४८, कु० ३।५५2. मूर्वा घास की बनी तगड़ी (क्षत्रियों के धारण किये जाने योग्य) – मनु० २।४२ ।