संस्कृत-शब्दकोशः

म्लै यकन्

य

यः [या+ड]


1. जो चलता है या गतिमान् है, जाने वाला, गन्ता
2. गाड़ी
3. हवा, वायु
4. मिलाप
5. यश
6. जौ ।


यम् (भ्वा० पर० यच्छति, यत, इच्छा० यियंसति)
1. रोकना, दमन करना, नियन्त्रण करना, वश में करना, दबाना, ठहराना, बन्द करना–यच्छेद्वाङ्मनसी प्रज्ञः –कठ०, यतचित्तात्मन्–भग० ४।२१,दे० यत
2. प्रदान करना, देना, अर्पण करना–प्रेर० (यमयति–ते) नियंत्रण करना, रोकना आदि,
आ–
1. विस्तार करना, लंबा करना, फैलाना,–वस्त्रम् पाणिमायच्छते –सिद्धा०, स्वाङ्गमायच्छमानः–श०४ (पाठान्तर)
2. ऊपर खींचना, वापिस खींचना,–आयच्छति कूपाद्रज्जुम्, सिद्धा०, बाणामुद्यतमायंसीत्–भट्टि० ६।११९
3. नियन्त्रित करना, थामना, दबाना, (श्वास आदि) रोकना–मनु० ३।२१७, ११।१००, याज्ञ० १।२४, अंगड़ाई लेना, (आ०) लम्बा बढ़ जाना
5. ग्रहण करना, अधिकार करना, रखना–श्रियमायच्छमानाभिरुत्तमाभिरनुत्तमाम्–भट्टि० ८।४६
6. ले आना, नेतृत्व करना,
उद्–
(प्रायः आ०)
1 उठाना, ऊपर करना, उन्नत करना–बाहू उद्यम्य–श० १, परस्य दण्डं नोद्यच्छेत् –मनु० ४।१०४, रघु० ११।१७, १५।२३, भट्टि० ४।३१
2. तैयार होना, प्रस्थान करना, आरंभ करना, (संप्र० या तुमुन्नन्त के साथ) उद्यच्छमाना गमनाय भूयः–रघु० १६।२९, भट्टि० ८।४७
3. प्रयास करना, घोर प्रयत्न करना–उद्यच्छति वेदम्–सिद्धा०
4. शासन करना, प्रबन्ध करना, हकूमत करना,
उप–
(आ०)
1. विवाह करना –भवान्मिथः समयादिमामुपायंस्त –श० ५, (मेनां) आत्मानुरूपां विधिनोपयेमे –कु० १।१८ रघु० १४।८७, शि० १५।२७
2. पकड़ना, थामना, लेना, स्वीकार करना, अधिकार करना–शस्त्राण्युपायंसत जित्वराणि–भट्टि० १।१६, १५।२१, ८।३३
3. प्रकट करना, संकेत करना–भट्टि० ७।१०१,
नि–
1. नियंत्रित करना, दमन करना, रोकना, वश में करना, शासन करना–प्रकृत्या नियताः स्वया –भग० ७।२०, (सुतां) शशाक मेना न नियन्तुमुद्यमात्–कु० ५।५, 'उसे हटा नहीं सका' आदि
2. दबाना, निलंबित करना, रोकना, (श्वास आदि) – मनु० २।१९२ –न कथंचन दुर्योनिः प्रकृति स्वां नियच्छति –मनु० १०।५९, 'न दबाता है न छुपाता है' आदि
3. दान करना, देना
~को
नः
कूले निवपनानि नियच्छतीति–श० ६।२४
4. सजा देना, दण्ड देना नियन्तव्यश्च राजभिः –मनु० ९।२।१३
5. विनियमित करना या निदेशित करना
6. प्राप्त करना, अवाप्त करना–तालज्ञश्चाप्रयासेन मोक्षमार्गं नियच्छति–याज्ञ० ३।११५, मनु० २।९३
7. धारण करना (प्रेर०)
1. नियंत्रित करना, वश में करना, विनियमित करना, रोकना, दण्ड देना–नियमयसि बिमार्गप्रस्थितानात्तदण्ड:–श० ५।८
2. बाँधना, कसना–शि० ७।५०, रघु० ५।७३
3. मर्यादित करना, हलका करना, विश्राम देना– कु० १।६१,
विनि–
दमन करना, नियंत्रण रखना, भग० ६।२४,
सम्–
1. नियंत्रित करना, दमन करना, रोकना, नियंत्रण में रखना (आ०)–भग० ६।३६, मनु० २।१००
2. बांघना, कैद करना, कसना, बंदी बनाना –वानरं मा न संयसी:–भट्टि० ९।५०, मालवि० १।७, रघु० ३।२०, ४२
3. एकत्र करना (आ)–व्रीहीन्संयच्छते–सिद्धा०
4. बन्द करना, भेड़ना – भग० ८।१२ ।



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