संस्कृत-शब्दकोशः

यज् यज्ञायज्ञीय

यज्ञ

यज्ञः [यज्+(भावे) नङ्]


1. याग या मख, यज्ञ सम्बन्धी कृत्य–यज्ञेन यज्ञमयजन्त देवाः, तस्माद्यज्ञात्सर्व हुतः –आदि
2. पूजा का कार्य, कोई भी पवित्र या भक्ति सम्बन्धी क्रिया (प्रत्येक गृहस्थ, विशेषत: ब्राह्मण को प्रति पाँच ऐसे भक्तिपरक कृत्य प्रतिदिन करने पड़ते हैं, भूतयज्ञ, मनुष्ययज्ञ, पितृयज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ, यही पाँचों समष्टिरूप से 'पञ्च महा यज्ञ' कहलाते हैं, दे० 'महायज्ञ' और 'पाँच' शब्द पृथक्–पृथक्)
3. अग्नि का नाम
4. विष्णु का नाम ।
समस्त पद
~अंशः
यज्ञ का एक भाग,
°भुज्
(पुं०) देवता देव–कु० ३।१४
अ(आ)गारः, –रम्
एक यज्ञीय भूमि,
~अङ्गम्
1. यज्ञ का एक भाग
2. कोई भी यज्ञीय आवश्यकता, यज्ञ का साधन –यज्ञाङ्गयोनित्वमवेक्ष्य यस्य–कु० १।१७,
(–गः)
1. गूलर का पेड़
2. विष्णु का नाम,
~अरिः
शिव का विशेषण,
~अशनः
देव,
~आत्मन्
(पुं०),
~ईश्वरः
विष्णु का नाम,
~उपकरणम्
यज्ञपात्र या यज्ञ का कोई आवश्यक उपकरण,
~उपवीतम्
द्विजों द्वारा पहना जाने वाला यज्ञोपवीत (अब आज कल और निम्न जातियाँ भी पहनती हैं) जो बायें कन्धे के ऊपर तथा दाहिनी भुजा के नीचे पहना जाता है –दे० मनु० २।६३ (मूल रूप से 'यज्ञोपवीत' उपनयन संस्कार का ही नाम है जिसमें जनेऊ पहना जाय),
~कर्मन्
(वि०) यज्ञकार्य में व्यस्त (नपुं०) यज्ञीय कृत्य,
~कल्प
(वि०) यज्ञ की प्रकृति का, या यज्ञ के समान,
~कीलकः
वह खूँटा जिसके साथ यज्ञीय बलि–पशु बाँधा जाता है,
~कुण्डम्
हवनकुण्ड, अग्निकुण्ड,
~कृत्
(वि०) यज्ञानुष्ठान करने वाला, (पुं०)
1. विष्णु का नाम
2. यज्ञ कराने वाला पुरोहित,
~क्रतुः
1. यज्ञीय कृत्य
2. पूर्णकृत्य या मुख्य अनुष्ठान
3. विष्णु का विशेषण,
~घ्नः
वह राक्षस जो यज्ञों में विघ्न डालता है,
~दक्षिणा
यज्ञीय उपहार, यज्ञानुष्ठान कराने वाले पुरोहित को दी जाने वाली दक्षिणा,
~दीक्षा
1. किसी यज्ञीय कृत्य में प्रवेश या उपक्रम
2. यज्ञ का अनुष्ठान मनु० ५।१६९,
~द्रव्यम्
यज्ञ के लिए प्रयुक्त होने वाली कोई वस्तु (उदा० यज्ञ पात्र आदि),
~पतिः
1. जो किसी यज्ञ की स्थापना या प्रतिष्ठा करता है दे० 'यजमान'
2. विष्णु का नाम,
~पशुः
1. यज्ञ के लिए पशु, यज्ञीय बलि
2. घोडा,
~पुरुषः, ~फलदः
विष्णु के विशेषण,
~भाग:
1. यज्ञ का एक अंश, यज्ञ के उपहारों में हिस्सा
2. देव, देवता,
~भुज्
(पुं०) देव, देवता,
~भूमिः
(स्त्री०) यज्ञ के लिए स्थान, यज्ञीय भूमि,
~भृत्
(पुं०) विष्णु का विशेषण,
~भोक्तु
(पुं०) विष्णु या कृष्ण का विशेषण,
~रसः, ~रेतस्
(नपुं०) सोम,
~वराहः
शूकरावतार में विष्णु,
~वल्लिः, –ल्ली
(स्त्री०) सोम की बेल या पौधा,
~वाटः
यज्ञ के लिए तैयार की गई या घेरी गई भूमि,
~वाहनः
विष्णु का विशेषण,
~वृक्षः
वट वृक्ष,
~वेदिः, –दी
(स्त्री०) यज्ञ की वेदी,
~शरणम्
यज्ञकक्ष या अस्थायी छप्पर जिसके नीचे बैठकर यज्ञ किया जाय,
~शाला
यज्ञ का कमरा,
~शेषः, –षम्
यज्ञ का अवशिष्ट–यज्ञशेषं तथामृतम् – मनु० ३।२८५,
~श्रेष्ठा
सोम का पौधा,
~सदस्
(नपुं०) यज्ञ में उपस्थित जनमण्डली,
~संभारः
यज्ञ के लिए आवश्यक सामग्री,
~सारः
विष्णु का विशेषण,
~सिद्धिः
(स्त्री०) यज्ञ की पूर्ति,
~सूत्रम्
दे० यज्ञोपवीत,
~सेनः
राजा द्रुपद का विशेषण,
~स्थाणुः
यज्ञ का खम्भा,
~हन्(पुं०), ~हनः
शिव का विशेषण ।


यज्ञः [यज्+न]


1. यज्ञ, यज्ञीय संस्कार
2. पूजा की प्रक्रिया
3. अग्नि
4. विष्णु ।
समस्त पद
~आयुधम्
यज्ञ में प्रयुक्त किया जाने वाला उपकरण,
~गुह्यः
कृष्ण,
~पत्नी
यजमान की पत्नी,
~शिष्टम्
यज्ञ का अवशिष्ट अंश–यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्विषैः –भग० ३।१३,
~संस्तरः
यज्ञ की वेदी की स्थापना तथा इष्टकाचयन ।

परिशिष्ट



Correction: