यज् (भ्वा० उभ० यजति–ते, इष्ट, कर्मवा० इज्यते, इच्छा० यियक्षति–ते)
1. यज्ञ करना, त्याग पूर्वक पूजा करना (प्रायः 'यज्ञार्थक' शब्दों के करण से संबद्ध); –यजेत राजा क्रतुभिः–मनु० ७।७९, ५।५३, ६।३६, ११।४०, भट्टि० १४।९०, इसी प्रकार 'अश्वमेधेनेजे, पाकयज्ञेनेजे–आदि
2. आहुति देना (देवतापरक कर्म० तथा यज्ञीय साधन या आहुतिपरक करण० के साथ) –पशुना रुद्रं यजते –सिद्धा० यस्तिलैः यजते पितृन् –महा०, मनु० ८।१०५, ११।११८
3. पूजा करना, सुभूषित करना, सम्मान करना, आदर करना प्रेर० (याजयति–ते)
1. यज्ञ करवाना
2. यज्ञ में सहायता देना ।
अ–, परि–, प्र–
यज्ञ करना, आहुति देना,
सम्–
अलंकृत करना, पूजा करना–समयष्टास्त्रमण्डलम् – भट्टि० १५।९६ ।