यथा (अव्य०) [यद् प्रकारे थाल्]
1. स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त होने पर इसके निम्नांकित अर्थ हैं
(क) कथितरीति के अनुसार–यथाज्ञापयति महाराज: –
“जैसा कि महाराज आज्ञा करते हैं”
(ख) नामतः, जैसा कि आगे आता है –तद्यथानुश्रूयते पुं० १, उत्तर० २।४
(ग) जैसा कि, की भांति (तुलनाद्योतक तथा समानता के चिह्न का सूचक) आसीदियं दशरथस्य गृहे यथा श्री: –उत्तर० ४।८, कु० ४।३४, प्रभावप्रभवं कान्तं स्वाधीनपतिका यथा (न मुंचति)– काव्य० १०
(घ) जैसा कि उदाहरणस्वरूप, –दृष्टान्ततः यत्र यत्र धूमस्तत्र तत्र वह्निर्यथा महानसे–तर्क०, पंच० १।२८८,
(ङ) प्रत्यक्ष उक्ति को आरंभ करने के समय प्रयुक्त, अन्त में चाहे 'इति' हो या न हो– अकथितोऽपि ज्ञायत एव यथायमाभोगस्तपोवनस्येति–श० १, विदितं खलु ते यथा स्मरः क्षणमप्युत्सहते न मां विना –कु० ४।३६, (स्त्री) जिससे कि, इसलिए कि–दर्शय तं चौरसिंहं यथा व्यापादयामि – पंच १
2. तथा के सहवर्तित्व में प्रयुक्त होकर 'यथा' के निम्नलिखित अर्थ हैं –
(क) जैसा, वैसा (इस अवस्था में तथा के स्थान में एवं' और 'तद्वत्' भी बहुधा प्रयुक्त होते हैं) यथा वृक्षस्तथा फ़लम् –या यथाबीजं तथाङ्कुरः–भग० ११।२९ (इस अवस्था में संबंध की समानता को अधिक आश्चर्यजनक और प्रभावशाली बनाने के लिए 'एवं' शब्द यथा के साथ, अथवा दोनों के साथ जोड़ दिया जाता है)–वधूचतुष्केऽपि यथैव शान्ता प्रिया तनूजास्य तथैव सीता–उत्तर० ४।१६, न तथा बाधते स्कन्धो (या शीतम् ) यथा बाधति बाधते, (इतना–जितना, जैसा कि)–कु० ६।७०, उत्तर० २।४, विक्रम० ४।३३, इस अर्थ में 'तथा' का बहुधा लोप कर दिया जाता है, तब उस अवस्था में 'यथा' का अर्थ उपर्युक्त
(ग) में दिया हुआ है,
(ख) ताकि जिससे कि (यहाँ 'यथा' 'जिससे' और तथा 'कि' को सूचित करता है)–यथा बन्धुजनशोच्या न भवति तथा निर्वाहय –श० ३, तथा प्रयतेथा यथा नोपहस्यते जनैः का०–१०१, तस्मान्मुच्ये यथा तात संविधातुं तथार्हसि –रघु० १।७२, ३६, ३।६६ १५।६८,
(ग) क्योंकि इसलिए, क्योंकि, अत:–यथा इतोमुखागतैरपि कलकल: श्रुतस्तथा तर्कयामि आदि मा० ८, कभी–कभी तथा' को लुप्त कर दिया जाता है–मन्दं मन्दं नुदति पवनश्चानुकूलो यथा त्वाम्, सेविष्यन्तेनयनसुभगं खे भवन्तं बलाकाः–मेघ० ९
(घ) यदि –तो, इतने विश्वास से कि, बड़े निश्चय से (उक्ति और अनुरोध का दृढ रूप)–
“वाङ्मनःकर्मभिः पत्यो व्यभिचारो यथा न मे ।
तथा विश्वम्भरे देवि मामन्तर्धातुमर्हसि ॥”
–रघु० १५।८१, ‘यथा यथा –तथा तथा’–जितना अधिक उतना ही जितना कम उतना ही–यथायथा यौवनमतिचक्राम तथा तथावर्धतास्य संताप:–का० ५९. मनु० ८।२८६, १२।७३, ‘यथा-तथा’ किसी रीति से, किसी भी ढंग से, ‘यथाकथंचित्’ किसी न किसी प्रकार । (विशे० अव्ययीभाव समास के प्रथम पद के रूप में प्रयुक्त होकर ‘यथा’ का प्रायः अनुवाद किया जाता है, के अनुसार, के अनुरूप, तदनुसार, तदनुरूप, के अनुपात से, अधिक न होकर, दे० समस्त शब्द नीचे,
~अंशम्, ~अंशतः
(अव्य०) ठीक-ठीक अनुपातनुरूप में,
~अधिकारम्
(अव्य०) अधिकार या प्रमाण के अनुसार,
~अधीत
(वि०) जैसा पढ़ा हुआ या अध्ययन किया हुआ है, मूलपाठ के समनुरूप,
~अनुपूर्वम्, ~अनुपूर्व्यम्, ~अनुपूर्व्या
(अव्य०) नियमित क्रम या परम्परा में, क्रमशः, यथाक्रम,
~अनुभूतम्
(अव्य०)
1. अनुभव के अनुसार
2. पूर्वानुभव के अनुरूप,
~अनुरूपम्
(अव्य०) यथार्थ समनुरूपता में, उचित रूप से,
~अभिप्रेत, ~अभिमत, ~अभिलषित, ~अभीष्ट
(वि०) जैसा कि चाहा था, जैसा कि इरादा था या इच्छा की थी, इच्छा के अनुकूल,
~अर्थ
(वि०)
1. सचाई के अनुरूप, सत्य, वास्तविक, सही–सौम्येति चाभाष्य यथार्थभाषी –रघु० १४।४४, इसी प्रकार 'यथार्थानुभवः' (सही या शुद्ध प्रत्यक्ष ज्ञान) और 'यथार्थवक्ता'
2. सत्य अर्थ के समनुरूप, अर्थ के अनुसार सही ठीक, उपयुक्त, सार्थक –करिष्यन्निव नामास्य (अर्थात् शत्रुघ्न) यथार्थमरिनिग्रहात् –रघु० १५।६, युधि सद्यः शिशुपाल तां यथार्था –शि० १६।८५, कि० ८।३९, कु० १।१६
3. योग्य, उपयुक्त
(–र्थम्, –अर्थतः)
सत्यतापूर्वक, सही, उचित प्रकार से,
°अक्षर
(वि०) सार्थक, अक्षरशः सत्य – वि० १।१,
°नामन्
(वि०) जिसका नाम अर्थ की दृष्टि से सही है या पूर्णतः सार्थक है (जिसके कार्य नाम के अनुरूप है)–ध्रुवसिद्धेरपि यथार्थनाम्नः सिद्धिं न मन्यते–मालवि० ४, परन्तपो नाम यथार्थनामा–रघु० ६।२१,
°वर्णः
गुप्तचर ('यथार्हवर्ण के स्थान पर),
~अर्ह
(वि०)
1. गुणों के अनुसार अधिकारी
2. समुचित, उपयुक्त न्यायोचित,
°वर्णः
गुप्तचर, दूतः
~अर्हम्, ~अर्हतः
(अव्य०) गुण या योग्यता के अनुरूप–रघु० १६।४०,
~अर्हणम्
(अव्य०)
1. औचित्य के अनुरूप
2. गुण या योग्यता के अनुरूप,
~अवकाशम्
(अव्य०)
1. कक्ष या स्थान के अनुसार
2. जैसा कि अवसर हो, अवसरानुकूल, अवकाशानुकूल, औचित्यानुकूल
3. ठीक स्थान पर –प्रालम्बमुत्कृष्य यथावकाशं निनाय –रघु० ६।१४,
~अवस्थम्
(अव्य०) दशा या परिस्थिति के अनुकूल,
~आख्यात
(वि०) जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, पूर्वोल्लिखित,
~आख्यातम्
(अव्य०) जैसा कि पहले बतलाया गया है,
~आगत
(वि०) मूर्ख, जड,
(अव्य० –तम्)
जैसा कि कोई आया, उसी रीति से जैसे कि कोई आया –यथागतं मातलिसारथिर्ययौ –रघु० ३।६७,
~आचारम्
'अव्य०) प्रथा के अनुसार, जैसा कि प्रचलन है,
~आम्नातम्, ~आम्नायम्
(अव्य०) जैसा कि वेदों में विहित है,
~आरम्भम्
(अव्य०) आरंभ के अनुसार, नियमित क्रम या अनुक्रम में,
~आवासम्
(अव्य०) अपने रहने के अनुसार, प्रत्येक अपने अपने निवास के अनुसार,
~आशयम्
(अव्य०)
1. इच्छा या आशय के अनुसार
2. करार के अनुसार,
~आश्रमम्
(अव्य०) आश्रम या किसी व्यक्ति के धार्मिक जीवन के विशिष्ट के अनुसार,
~इच्छा, ~इष्ट, ~ईप्सित
(वि०) इच्छा या कामना के अनुसार, अपनी रुचि के अनुकूल, यथेष्ट, जैसा कि चाहा गया हो या कामना की गई हो,
(अव्य० –च्छम्, –ष्टम्, –तम्)
1. इच्छा या कामना के अनुसार, इच्छा या मन के अनुकूल –रघु० ४।५१
2. जितनी आवश्यकता हो, मन भर कर – यथेष्टं बुभुजे मांसम् –चौर० ३,
~ईक्षितम्
(अव्य०) जैसा कि स्वयं देखा हो, जैसा कि वस्तुतः प्रत्यक्ष किया हो,
~उक्त, ~उदित
(वि०) जैसा कि ऊपर कहा गया है, पूर्वोक्त, उपर्युल्लिखित यथोक्ताः संवृत्ताः पंच० १, यथोक्तव्यापारा –श० १, रघु० २।७०,
~उचित
(वि०) उपयुक्त, उचित, वाजिब, योग्य
(अव्य० –तम्)
ठीक-ठीक, उपयुक्त रूप से, उचित रूप से,
~उत्तरम्
(अव्य०) नियमित क्रम या परंपरा में, क्रमशः,–संबन्धोऽत्र यथोत्तरम् – सा० द० ७२९,
~उत्साहम्
(अव्य०)
1. अपनी शक्ति या ताकत के अनुसार
2. अपनी पूरी शक्ति से,
~उद्दिष्ट
(वि०) जैसा कि वर्णन किया गया है या संकेतित है,
(–ष्टम्) या उद्देशम्
(अव्य०) संकेतित रीति से,
~उपजोषम्
(अव्य०) मन या इच्छा के अनुसा
~उपदेशम्
(अव्य०) जैसा कि परामर्श या अनुदेश दिया गया है,
~उपयोगम्
(अव्य०) आवश्यकता या कार्य की दृष्टि से, परिस्थिति के अनुसार,
~काम
(वि०) इच्छा के अनुरूप
(अव्य० –मम्)
रुचि के अनुकूल, इच्छा के अनुरूप. मन भर कर –यथाकामार्चितार्थानाम्–रघु० १।६, ४।५१,
~कामिन्
(वि०) स्वतंत्र, प्रतिबंधरहित,
~कालः
ठीक सही समय, उचित समय–रघु० १।६,
(अव्य ० –लम्)
ठीक समय पर, समयानुकूल, मौसम के अनुसार –सोपसर्पैर्जजागार यथाकालं स्वपन्नपि –रघु० १७।५१
~कृत
(वि०) जैसा कि मान लिया गया है, किसी नियम या प्रथा के अनुसार किया गया, प्रथानुकूल –मनु० ८।१८३,
~क्रमम्, ~क्रमेण
(अव्य०) ठीक क्रम या परंपरा से, नियमित रूप से, सही रूप में उचित रीति से–रघु० ३।१०, ९।२६,
~क्षमम्
(अव्य ० ) अपनी शक्ति के अनुसार, जितना संभव हो,
~जात
(वि०) मूर्ख, अज्ञानी जड,
~ज्ञानम्
(अव्य०) व्यक्ति की अधिक से अधिक जानकारी या बुद्धि के अनुसार,
~ज्येष्ठम्
(अव्य०) पद के अनुसार, वरिष्ठता के अनुसार,
~तथ
(वि०)
1. सत्य, सही
2. परिशुद्ध, खरा,
(–थम्)
किसी वस्तु के विवरण या विशेषताओं का आख्यान, विवरण मूलक या सूक्ष्म कथन,
(अव्य० –थम्)
1. यथार्थतः, सूक्ष्मतया
2. सही तौर पर, उचित रूप से, जैसा कि वस्तुतः बात हो,
~दिक्, ~दिशम्
(अव्य०)सब दिशाओं में,
~निर्दिष्ट
(बि०) जैसा कि पहले उल्लेख हो चुका है, जैसा कि ऊपर विशेषता बता दी गई है–यथानिर्दिष्टव्यापारा सखी–आदि,
~न्यायम्
(अन्य०) न्यायतः, सही रूप से, उचित रीति से–मनु० १।१,
~पुरम्
(अव्य०) जैसा कि पहले था, जैसा कि पूर्व अवसरों पर था,
~पूर्व(वि०), ~पूर्वक
(वि०) जैसा कि पहले था, पूर्ववर्ती –रघु० १२।४८,
(–र्वम्), ~पूर्वकम्
(अव्य०)
1. जैसा कि पहले था –मनु० ११।१८७
2. क्रम या परंपरा में, क्रमश:–एते मान्या यथापूर्वम् –याज्ञ० १।३५,
~प्रदेशम्
(अव्य०)
1. उचित या उपयुक्त स्थान में –यथाप्रदेशं विनिवेशितेन–कु० १।४९, आसञ्जयामास यथाप्रदेशं कंठे गुणम्–रघु० ६।८३, ७।३४
2. विधि या निदेश के अनुसार,
~प्रधानम्, ~प्रधानतः
(अव्य०) पद या स्थिति के अनुकूल, पूर्ववर्तिता के अनुसार–आलोकमात्रेण सुरानशेषान् संभावयामास यथाप्रधानम्–कु० ७।४६,
~प्राणम्
(अव्य०) सामर्थ्य के अनुसार, अपनी पूरी शक्ति से,
~प्राप्त
(वि०) परिस्थितियों के अनुरूप,
~प्रार्थितम्
(अव्य०) प्रार्थना के अनुकूल,
~बलम्
(अव्य०) अपनी अधिकतम शक्ति के साथ, अपनी शक्ति से,
~भागम्, ~भागशः
(अव्य०)
1. प्रत्येक के भाग के अनुसार, ठीक अनुपात से
2. प्रत्येक अपने क्रमिक स्थान पर–यथाभागमवस्थिताः–भग १।११
3. ठीक स्थान पर–यथाभागमवस्थितेपि– रघु० ६।१९,
~भूतम्
(अव्य०) जो कुछ हो चुका उसके अनुसार, सचाई के अनुसार, सत्यतः, यथार्थतः,
~मुखीन
(वि०) ठीक सामने देखने वाला (संब० के साथ) –(मृगः) यथामुखीनः सीतायाः पुप्लुवे बहु लोभयन् –भट्टि० ५।४८,
~यथम्
(अव्य०)
1. यथा–योग्य, जैसा कि योग्य है, यथोचित–कि० ८।२
2. नियमित क्रम में, पृथक् पृथक् एक एक करके–बीजवन्तो मुखाद्यर्था विप्रकीर्णा यथायथम्–सा० द० ३३७
~युक्तम्, ~योगम्
(अव्य०) परिस्थितियों के अनुकूल, यथायोग्य, उपयुक्त रूप से,
~योग्य
(वि०) उपयुक्त, योग्य, उचित, सही,
~रुचम्, ~रुचि
(अव्य०) अपनी पसन्द या रुचि के अनुकूल,
~रूपम्
(अव्य)
1. रूप या दर्शन के अनुसार
2. ठीक–ठीक, यथोचित, यथायोग्य,
~वस्तु
(अव्य०) जैसे कि तथ्य हैं, यथार्थतः, विशद्ध रूप से. सचमुच,
~विधि
(अव्य०) नियम या विधि के अनुसार, ठीक–ठीक, यथोचित यथाविधिहुताग्नीनाम्–रघु० १।६, संचस्कारोभयप्रीत्या मैथिलेयौ यथाविधि–१५।३१, ३७०,
~विभवम्
(अव्य०) अपनी आय के अनुपात से, अपने साधनों के अनुरूप,
~वृत्त
(वि०) जैसा कि हो चुका है, किया गया है,
(–त्तम्)
वास्तविक तथ्य, किसी घटना की परिस्थितियाँ या विवरण,
~शक्ति, ~शक्त्या
(अव्य०) अपनी अधिकतम शक्ति के अनुसार, जहाँ तक संभव हो,
~शास्त्रम्
(अव्य०) धर्मशास्त्रों के अनुसार जैसा कि धर्मशास्त्रों में विहित है–मनु० ६।८८,
~श्रुतम्
( अव्य० )
1. जैसा कि सुना है, या बताया गया है
2. (‘यथाश्रुति’) वैदिक विधि के अनुसार,
~संख्यम्
अलंकार शास्त्र में एक अलंकार –यथासंख्यं क्रमेणैव क्रमिकाणां समन्वयः–काव्य० १०–उदा० शत्रुं मित्रं विपत्तिं च जय रञ्जय भञ्जय–चन्द्रा० ५।१०७,
(–ख्यम्), ~संख्येन
(अव्य०) संख्या के अनुसार, क्रमशः, संख्या के संख्या–याज्ञ० १।२१,
~समयम्
(अव्य०)
1. उचित समय पर, करार के अनुसार, सर्वसम्मत प्रचलन के अनुसार,
~संभव
(वि०) शक्य, जो हो सके,
~सुखम्
(अव्य०)
1. मन या इच्छा के अनुसार
2. आराम से, सुखपूर्वक, इच्छानुकूल, जिससे सुख हो,–अङ्के निघाय करभोरु यथासुखं ते संवाहयामि चरणांवुत पद्मताम्रौ–श० ३।२२, रघु० ८।४८, ४।४३,
~स्थानं
सही और उचित स्थान,
(अव्य० –नम्)
उचित स्थान पर, ठीक-ठीक,
~स्थित
(वि०)
1. वास्तविक तथ्य या परिस्थितियों के अनुकूल, जैसी कि स्थिति हो–भट्टि० ८।८
2. सचमुच, उचित रूप से,
~स्वम्
(अव्य०)
1. अपने अपने क्रम से, क्रमशः – अध्यासते चीरभृतो यथास्वम्– रघु० १३।२२, कि० १४।४३.
2. वैयक्तिक रूप से– रघु० १७।६५,
3. ठीक ठीक, यथोचित, सही रूप से ।
यथा (अ०) [यद् प्रकारे थाल्]
जिस ढंग, जिस रीति से, जैसे, जिस प्रकार ।
समस्त पद
~अनूक्तम्
(अ०) जैसा कि बतलाया गया है, या निर्देश किया गया है–मया यथानूक्तमवादि ते हरेः –चेष्टितम् – भाग० ३।१९।३२,
~आश्रयम्
( अ० ) आधार के अनुसार सां० का० ४१,
~उद्गत
(वि०) ज्ञानशून्य, मूर्ख
~उद्गमनम्
(अ०) आरोह अनुपात के अनुसार,
~उपचारम्
(अ०) औचित्य के अनुरूप, शिष्टाचारसापेक्ष,
~उपदिष्ट
(वि०) जैसा निर्देश दिया गया हो, या जैसा परामर्श दिया गया हो,
~कारम्
(अ०). जिस किसी रीति से, –पा० ३।४।२८,
~क्लृप्ति
(अ०) समुचित रीति से,
~क्षिप्रम्
(अ०) जितनी जल्दी हो सके,
~चित्तम्
(अ०.) अपनी इच्छा के अनुसार,
~तथ्यम्
(अ०) सचमुच, वास्तव में,
~न्यासम्
(अ०) जैसा कि विधान है, जैसा कि मूल पाठ में है,
~न्युप्त
(वि०.) जैसा कि धरती में डाला गया है,
~पण्यम्
(अ०) विक्रेय वस्तु के मूल्य के अनुसार,
~प्रत्यर्हम्
(अ०) योग्यता के अनुसार
~प्रदिष्टम्
(अ०) जैसा अनुकूल हो, जैसा कि उपयुक्त हो,
~प्रस्तावम्
(अ०) सबसे पहले उपयुक्त अवसर पर,
~प्रस्तुतम्
(अ०)
1. अन्त में
2. प्रस्तुत विषय के अनुरूप,
~भूयस्
(अ०) वरीयता के अनुकूल,
~मूल्यम्
(अ०) मूल्य के अनुसार,
~रसम्
(अ०) रस या स्वाद के अनुकूल,
~लब्ध
(वि०) जैसा कि वस्तुतः प्राप्त हो चुका है,
~विनियोगम्
(अ०) निर्दिष्ट प्राथमिकता के अनुसार,
~व्युत्पत्ति
(अ०) ज्ञान की गहराई के अनुकूल,
~शब्दार्थम्
शब्द के अर्थों के अनुसार–यथाशब्दार्थं प्रवृत्तिः, मै० सं० ११।१।२६ पर भाष्य,
~संस्थम्
(अ०) परिस्थिति के अनुकूल,
~सवनम्
ऋतु के अनुकूल,
~सारम्
गुण के अनुसार,
~स्थूलम्
(अ०) जैसा कि अतिरिक्त रीति से कहा गया है,
~स्व
(वि०) अपने अपने आवास या स्थान के अनुसार ।
परिशिष्ट