यष्टी (स्त्री०) [यज्+क्तिन्, नि० न संप्रसारणम्]
1. लकड़ी, लाठी
2. सोटा, गदका, गदा
3. खंभा, सतून, स्तम्भ
4. अड्डा–जैसा कि 'वासयष्टि' में
5. वृन्त, का सहारा
6. झंड़े का डंडा जैसा कि ध्वजयष्टि' में
7. डंढल, वृन्त
8. शाखा, टहनी– 'कदम्बयष्टि: स्फुटकोरकेव–उत्तर० ३।४१, इसी प्रकार 'चूतयष्टि:–कु० –६।२, सहकारयष्टि: आदि
9. डोरी, लड़ी, (जैसे मोतियों की) हार,–विमुच्य सा हारमहार्यनिश्चया विलोलयष्टि: प्रविलुप्तचन्दनम्–कु० ५।८, रघु० १३।५४
10. कोई लता
11. कोई भी पतली या सुकुमार वस्तु ('शरीर' अर्थ को प्रकट करने वाले शब्दों के पश्चात् समास के अन्त में प्रयोग)–तं वीक्ष्य वेपथुमती सरसाङ्गयष्टि: –कु० ५।८५, 'पसीने से तर सुकुमार अंगों वाली' ।
समस्त पद
~ग्रहः
गदाधारी, लाठी रखने वाला
~निवासः
मोर आदि पक्षियों के बैठने का अड्डा –वृक्षेशया यष्टिनिवासभङ्गात्–रघु० १६।१४
2. खड़े हुए डंडों पर स्थिर कबूतरों का घर या छतरी,
~प्राण
(वि०)
1. निर्बल, शक्तिहीन
2. प्राणहीन ।
यष्टी दे० यष्टि ।