याच् (भ्वा० आ० याचते–विरल प्रयोग–याचति याचित) मांगना, याचना करना, निवेदन करना, प्रार्थना करना, अनुरोध करना, अनुनय–विनय करना (द्विकर्म० के साथ)–बलिं याचते वसुधाम्–सिद्धा०, पितरं प्रणिपत्य पादयोरपरित्यागमयाचतात्मनः–रघु० ८।१२, भट्टि० १४।१०५ (उपसर्ग लगने पर इस धातु के अर्थों में कोई महान् परिवर्तन नहीं होता) ।