यामः [यम्+घञ्]
1. निरोध, धैर्य, नियन्त्रण
2. पहर, दिन का आठवाँ भाग, तीन घंटे का समय–पश्चिमाद्यामिनीयामात्प्रसादमिव चेतना–रघु० १७।१, इसी प्रकार. यामवती, त्रियामा आदि ।
समस्त पद
~घोषः
1. मुर्गा
2. घण्टा या घडियाल जिससे रात के पहरों की टनटन होती है–मन्द्रध्वनित्याजितयामतूर्यः–रघु० ६।५६,
~यमः
प्रत्येक घण्टे के लिए निर्दिष्ट कार्य,
~वृत्तिः
(स्त्री०) पहरा देना, चौकीदारी करना ।
याम (वि०) ( स्त्री० –‘मी’) [यम+अण्]
यम से संबन्ध रखने वाला–याभिश्चिरं यातना:– मुकुन्द० १०,
~म:
(पुं०) देवों का समुदाय–यामैः परिवृतो देवैः–भाग० ८।१।१८ ।
समस्त पद
~नादिन्
मुर्गा,
~पाल:
समय पालक,
~भद्रः
मंच ।
परिशिष्ट