रथः [रम्यतेऽनेन अत्र वा– रम्+कथन्]
गाड़ी, जलूसी गाड़ी, यान, वाहन, विशेषकर युद्धरथ
2. नायक (रथिन्)
3. पैर,
4. अवयव, भाग, अंग
5. शरीर, तु० आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु –कठ०
6. नरकुल ।
समस्त पद
~अक्षः
गाड़ी का धुरा
~अंगम्
1. गाड़ी का कोई भाग
2. विशेषकर गाडी के पहिये –रथो रथांगध्वनिना विजज्ञे – रघु० ७।४१, श० ७।१०
3. चक्र, विशेषकर विष्णु का,–चक्रधर इति रथांगमदः सततं बिभर्षि भुवनेषु रूढये–शि० १५।२६
4. कुम्हार का चाक
°आह्वयः, °नामकः, °नामन्
(पुं०) चकवा, चक्रवाक–रथांगनामन् वियतो रथांगश्रोणिबिंबया, अयं त्वां पृच्छति रथी मनोरथशतैर्वतः–विक्रम ४।१८, कु० ३।३७, रघु० ३।२४. (कविसमय के अनुसार चकवा रात होने पर चकवी से वियुक्त हो जाता है, फिर सूर्योदय होने पर उनका मेल होता है)
°पाणिः
विष्णु का नाम,
~ईशः
रथ पर बैठ कर युद्ध करने वाला योद्धा,
~ईषा, –शा
गाड़ी का जोडा (गाडी में लगने वाली सबसे लम्बी दो लकड़ियाँ जिन पर गाड़ी का सारा ढांचा जमाया जाता है),
~उद्वहः, ~उपस्थः
रथ का वह स्थान जहाँ सारथि बैठता है चालक का आसन,
~कट्या, ~कड्या
रथों का समूह
~कल्पकः
राजा के रथों की व्यवस्था का अधिकारी
~कारः
गाड़ी बनाने वाला, बढ़ई, पहिये घड़ने वाला –रथकार: स्वकां भार्यां सजारां शिरसावहत् –पंच० ४।५४,
~कुटुंबिकः, ~कुटुंबिन्
(पुं०) रथवान्, सारथि
~कूबरः, –रम्
गाड़ी की शहतीरी
~केतुः
रथ का झण्डा,
~क्षोभः
रथ का हचकोला–रघु० १
~गर्भकः
डोली, पालकी,
~गुप्तिः
(स्त्री०) रथ के चारों ओर लगा लोहे या लकडी का ढांचा जिससे रथ की किसी से टकराने पर रक्षा हो सके,
~चरणः, ~पादः
1. रथ का पहिया
2. चकवा,
~चर्या
इधर उधर घुमना, रथ का उपयोग, रथ पर सवारी करना–अनभ्यस्तरथचर्या:– उत्तर०५.
~धुर्
(स्त्री०) गाड़ी के जोड़े की गहतीरी.
~नाभिः
(स्त्री०) रथ के पहिये की नाह या नाभि,
~नीडः
रथ के अन्दर का भाग या आसन,
~बंधः
रथ का साज-सामान, रस्मी आदि,
~महोत्सवः, ~यात्रा
रथ में देव प्रतिमा स्थापित कर जलूस निकालना (ऐसे रथ को प्रायः मनुष्य स्वयं खींचते हैं),
~मुखम्
गाड़ी का अगला भाग,
~युद्धम्
'रथों का युद्ध' वह युद्ध जिसमें योद्धा रथों पर बैठ कर युद्ध करते हैं,
~वर्त्मन्(नपुं०), ~वीथिः
राजमार्ग, मुख्य सड़क,
~वाहः
1. रथ का घोड़ा
2. सारथि,
~शक्तिः
(स्त्री०) वह ध्वज जिस पर रथ शुद्ध की पताका लहराती रहती है,
~शाला
गाड़ीघर, गाड़ियाँ रखने का स्थान,
~सप्तमी
माघशुक्ला सप्तमी का दिन ।
रथः [रम्+कथन्]
1. गाड़ी, बहली
2. पैर
3. अंग, भाग,
4. शरीर
5. हर्ष, आह्लाद ।
समस्त पद
~आरोहः
जो रथ पर बैठ कर युद्ध करता है,
~उडुपः, ~उडुपम्
रथ का ढांचा,
~घोषः
रथ के चलने का 'घरधर' शब्द,
~वारकः
शूद्र द्वारा सैरन्ध्री में उत्पन्न पुत्र,
~विज्ञानम्, ~विद्या
रथ हाँकने की कला ।
परिशिष्ट