रस्
i (भ्वा० पर० रसति, रसित)
1. दहाड़ना, हूहू करना, चिल्लाना, चीखना–करीव वन्यः परुषं ररास –रघु० १६।७८, शि० ३।४८
2. शब्द करना, कोलाहल करना, टनटन करना, झनझन करना –राजन्योपनिमंत्रणाय रसति स्फीतं यशोदुन्दुभिः –वेणी० १।२५, रसतु रसनापि तव धनजघनमण्डले –गीत० १०
3. प्रतिध्वनि करना, गूंजना ।
ii (चुरा० उभ० रसयति–ते, रसित) चखना, स्वाद लेना –मृद्वीका रसिता –भामि० ४।१३, शि० १०।२७ ।