संस्कृत-शब्दकोशः

राक्षा रागिन्

राग

रागः [रञ्ज् भावे घञ्, नलोपकुत्वे]


1. वर्ण, रंग, रंजक वस्तु
2. लाल रङ्ग, लालिमा,–अधरः किसलयराग:–श० १।२१
3. लाल रङ्ग, लाल रङ्ग की लाख, महावर,–रागेण बालारुणकोमलेन चूतप्रवालोष्ठमलञ्चकार–कु० ३।३०, ५।११
4. प्रेम, प्रणयोन्माद, स्नेह, प्रीतिविषयक या काम–भावना, – मलिनेऽपिरागपूर्णाम् –भामि० १।१०० (यहाँ इसका अर्थ 'लाली भी है) –अथ भवन्तमन्तरेण कीदृशोऽस्या दृष्टिरागः–श० २, ६० 'चक्षूराग' भी
5. भावना संवेग, सहानुभूति, हित
6. हर्ष, आनन्द
7. क्रोध रोष
8. प्रियता, सौन्दर्य
9. संगीत के राग या स्वरग्राम मूलराग छः हैं–
“भैरवः कोशिकश्चैव हिन्दोलो दीपकस्तथा ।
श्रीरागो मेघरागश्च रागाः षडिति कीर्तिता: ॥”
–भरत । दूसरे लेखकों ने भिन्न-भिन्न नाम बतलाये हैं, प्रत्येक राग के अनुरूप उनके साथ छः छः रागिनियाँ होती हैं, इस प्रकार सबको मिलाकर संगीत के अनेक राग हो जाते हैं)
10. संगीत की संगति, संगीतमाधुर्य–तवास्मि गीतरागेण हारिणा प्रसभं हृतः–श० १।५, अहो रागपरिवाहिणी गीतिः–श० ५
11. खेद, शोक
12. लालच, ईर्ष्या ।
समस्त पद
~आत्मक
(वि०) जोशीला,
~चूर्णः
1. खैर का वृक्ष
2. सिन्दूर
3. लाख
4. होली के उत्सव पर एक दूसरे पर फेंका जाने वाला गुलाल या अबीर
5. कामदेव,
~द्रव्यम्
रंगने वाला पदार्थ, रङ्गलेप, रङ्ग,
~बन्धः
भावना का प्रकटीकरण, (नाना प्रकार संवेगों के) उपयुक्त वर्णन से उत्पन्न रुचि–भावो भावं नुदति विषयाद्रागबन्धः स एव –मालवि० २।९,
~युज्
(पुं०) लाल,
~सूत्रम्
1. रङ्गीन धागा
2. रेशमी धागा
3. तराजू की डोरी ।


रागः [रञ्ज्+घञ्]


1. प्रज्वलन
2. मिर्चमसाला
3. प्रेम, आवेश, यौनभावना
4. लालिमा ।
समस्त पद
~वर्धनः
एक प्रकार का (संगीत का) माप ।

परिशिष्ट



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