राध्
i (स्वा० पर० राध्नोति, राद्ध; इच्छा० रिरात्सति, परन्तु 'मारना चाहता है' के लिए रित्सति)
1. राजी करना, मनाना, प्रसन्न करना
2. सम्पन्न करना, कार्यान्वित करना, पूरा करना, अनुष्ठान करना, निष्पन्न करना
3. प्रस्तुत करना, तैयार करना
4. क्षतिग्रस्त करना, नष्ट करना, मार डालना, उखाड़ना – वानरा भूधरान् रेधुः–भट्टि० १४।१९ ।
ii (दिवा० पर० राध्यति, राद्ध)
1. अनुकूल या दयार्द्र होना,
2. सम्पन्न, या पूर्ण होना
3. सफल होना, कामयाब होना, समृद्ध होना
4. तैयार होना
5. मार डालना, नष्ट करना, प्रेर० (राधयति-ते)
1. राजी करना
2. सम्पन्न करना, पूरा करना,
अनु–
आराधना करना, पूजा करना, मनाना,
अप–
1. रुष्ट करना, ठेस पहुंचाना, पाप करना (संबं० या अधि० के साथ, अथवा स्वतंत्र रूप से)–यस्मिन्कस्मिन्नपि पूजार्हेऽपराद्धा शकुन्तला–श० ४, अपराद्धोऽस्मि तत्र भवतः कण्वस्य–श० ७
2. चूक जाना, लक्ष्यवेध न कर सकना, शि० २।२७
3. सताना, चोट पहुँचाना, क्षतिग्रस्त करना–न तु ग्रीष्मस्यैवं सुभगमपराद्धं युवतिषु –श० ३।९,
आ–
आराधना करना (प्रेर०)
1. राज़ी करना, मनाना, प्रसन्न करना –परेषां चेतांसि प्रतिदिवसमाराध्य बहुधा–भर्तृ० ३।३४, २।४, ५
2. पूजा करना, सेवा करना–मेघ० ४५,
वि–
चोट पहुँचाना, क्षतिग्रस्त करना, रुष्ट करना, ठेस पहुँचाना, –क्रियासमभिहारेण विराध्यन्तं क्षमेत क:–शि० २।४३, विराद्ध एवं भवता विराद्धा बहधा च नः–२।४१ ।