संस्कृत-शब्दकोशः

रिङ्ग् रिटि

रिच्

रिच् (रुधा० उभ० रिणक्ति, रिंक्ते, रिक्त)
1. खाली करना, रिताना, साफ करना, निर्मल करना–रिणच्मि जलधेस्तोयम्–भट्टि० ६।३६, आविर्भूते शशिनि तमसा रिच्यमानेव रात्रिः–विक्रम० १।८
2. वञ्चित करना, विरहित करना – (प्रायः भू० क० कृ०) दे० रिक्त,
अति–
आगे बढ़ना, प्रगति करना, पीछे छोड़ देना (कर्म वा० में और अपा० के साथ)–गृहं तु गृहिणीहीनं कान्तारादतिरिच्यते–पंच० ४।८१, हि० ४।१३१,भग० २।३६, वाचः कर्मातिरिच्यते –"उपदेश से निदर्शन उत्तम है" एग्जांपल इज़ बैटर दैन प्रिसैप्ट –Example
is better than Precep )
~उद्–
1. आगे बढ़ना, पीछे छोड़ देना, प्रगति करना
2. बढ़ाना, विस्तार करना,
व्यति–
बढ़ जाना, पीछे छोड़ना –स्तुतिभ्यो व्यतिरिच्यन्ते दूराणि चरितानि ते –रघु० १०।३० ।
ii (भ्वा० चुरा० पर० रेचति, रेचयति, रेचित
1. विभक्त करना, वियुक्त करना, अलग–अलग करना
2. परित्याग करना, छोड़ना
3. सम्मिलित होना, मिलना,
आ–
सिकोड़ना, खेल–खेल में चलना–आरेचितभ्रूचतुरैः कटाक्षैः–कु० ३।५ ।



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