संस्कृत-शब्दकोशः

रुधिर रुरु

रुध्

रुध् (रुधा० उभ० रुणद्धि, रुद्धे, रुद्ध, –इच्छा० रुरुत्सति –ते)
1. अवरुद्ध करना, ठहराना, गिरफ्तार करना, रोकना, विरोध करना, विघ्न डालना, बाधा डालना, मना करना–इदं रुणद्धि मां पद्ममन्तःकूजितषट्पदम् –विक्रम० ४।२१, रुद्धालोके नरपतिपथे –मेघ० ३७, ९१, प्राणापानगती रुध्वा०–भग० ४।२९
2. थामना, संधारण करना, (गिरने से) बचाना, –आशाबन्धः कुसुमसदृशं प्रायशो ह्यङ्गनानां सद्यःपाति प्रणयि हृदयं विप्रयोगे रुणद्धि, मेघ० १०
3. बन्द करना, ताला लगाना, रोकना, भेड़ना, बन्द कर देना –अधि० के साथ, परन्तु कभी–कभी दोकर्म० के साथ –भट्टि० ६।३५, ब्रजं रुणद्धि गाम्–सिद्धा०
4. वांधना, सीमित करना–व्यालं बालमृणालतन्तुभिरसौ रोद्धुं समुज्जृम्भते–भर्तृ० २।६
5. घेरा डालना, घेरना, नाकेबन्दी करना–रुन्धन्तु वारणघटा नगरं मदीयाः मुद्रा० ४।१७ –अरुणद् यवनः साकेतं–या –माध्यमिकान्–महा०, भट्टि० १४।२९
6. छिपाना, ढकना, काम ओझल करना, गुप्त करना
7. अत्याचार करना, सताना, अत्यन्त कष्ट देना;
अनु–
(बहुधा प्रयोग ऐसा होता है मानो धातु दिवा० की है)
1. अवेक्षण करना, अभ्यास करना–मनु० ५।६३
2. प्रेम करना, अनुरक्त होना –स्वधर्ममनुरुन्धते–कि० ११।७८, नानुरोत्स्ये जगल्लक्ष्मी:–भट्टि० १६।२३
3. आज्ञा मानना, अनुसरण करना, अनुरूप होना–नियतिं लोक इवानुरुध्यते–कि० २।१२, अनुरुध्यस्व चन्द्रकेतोर्वचनं–उत्तर० ५, मद्वचनमनुरुध्यते वा भवान् –कि० १८१
4. स्वीकृति देना, सहमत होना, अनुमोदन करना
5. प्रेरित करना, दबाव डालना,
अव–
1. रोकना, अटकाना–श० २।२
2. बन्दी, बनाना, कैद करना, बन्द करना (कभी–कभी दो कर्मों के साथ) –शोकं चित्तमवारुधत्–भट्टि० ६।९
3. घेरा डालना,
उप–
1. अवरुद्ध करना, विघ्न डालना–उपरुध्यते तपोऽनुष्ठानम्–श० ४
2. तंग करना, दुःखी करना, कष्ट देना– पौरास्तपोवनमुपरुन्धन्ति श० १
3. पार कर लेना, दबा देना –रघु० ४।८३
4. कैद करना, बन्दी बनाना, नियन्त्रण में रखना
5. छिपाना, ढक लेना,
नि–
1. अवरुद्ध करना, रोकना, विरोध करना बन्द करना–न्यरुधंश्चास्य पन्थानम्–भट्टि० १७।४९ १६।२०, मृच्छ० १।२२
2. बन्दी बनाना, कैद करना –मनु० ११।१७६, भग० ८।१२
3. ढकना, छिपाना –मनु० १४।१६,
प्रति–
अवरुद्ध करना,
वि–
विरोध करना, अवरोध करना
2. विवाद करना, झगड़ना
3. भिन्नमत का होना,
सम्–
1. अवरुद्ध करना, अटकाना, रोकना–स चेत्तु पथि संरुद्धः पशुभिर्वा रथेन वा–मनु० ८।२९५
2. बाधा डालना, रुकावट डालना, रोकना–रघु० २।४३
3. दृढ़तापूर्वक थामना, शृंखलाबद्ध करना–तृणमिव लघुलक्ष्मीर्नैव तान्संरुणद्धि–भर्तृ० २।१७
4. अधिकार में करना, बलात् अभिग्रहण करना, पकड़ना–मनु० ८।२३५ ।



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