संस्कृत-शब्दकोशः

लम्बुषा लम्भ

लम्ब्

लम्ब् (भ्वा० आ० लम्बते, लंवित)
1. लटकना, टांगना, दोलायमान होना – ऋषयो ह्यत्र लम्बन्ते – महा०
2. अनुषक्त होना, चिपकना, सहारा लेना, आश्रित होना–ललम्बिरे सदसि लताः प्रिया इव – शि० ७।७५, प्रस्थानं ते कथमपि सखे लम्बमानस्य भावि –मेघ० ४१ (यहां लं० का अर्थ है 'नीचे लटकता हुआ' या 'कूल्हों का सहारा लिये हुए')
3. नीचे जाना, डूबना, (सूर्य आदि का) अस्त होना या डूबना नीचे गिरना –लम्बमाने दिवाकरे –शि० ९।३०, कि० ९।१, त्वदधरचुम्बनलम्बितकज्जलमुज्ज्वलय प्रियलोचने –गीत० १२ (=गलित)
4. पीछे गिरना या पड़ना, पिछड़ना
5. विलंब करना, ठहरना
6. ध्वनि करना –प्रेर० (लम्बयति–ते),
1. हराना, नीचे लटकाना
2. ऊपर लटकाना, स्थगित करना
3. बिछाना, (हाथ आदि) फैलाना – करेण वातायनलम्बितेन– रघु० १३।२१, को लम्बयेदाहरणाय हस्तम् ६।७५,
अव–
लटकना, लटकाना, स्थगित होना –कनकशृङ्खलावलम्बिनी – मुद्रा० २
2. नीचे डूब जाना, उतरना
3. थामना, जुड़ना, झुकना या सहारा लेना, पालनपोषण करना –दण्डकाष्ठमवलम्ब्य स्थितः–श० २, ययौ तदीयामवलम्व्य चाङ्गुलिम् –रघु ३।२५
4. थामना, संभालना, पालनपोषण करना, जीवित रहना (आलं० से भी) ले लेना –हस्तेन तस्थावलम्व्य वासः –रघु ७।९, कु० ३।५५, ६।६८, हृदयं न त्ववलम्बितुं क्षमाः–रघु० ८।६०
5. निर्भर रहना, टिकना –व्यवहारोऽयं चारुदत्तमवलम्बते –मृच्छ० ९, भट्टि० १८।४१
6. सहारा लेना, आश्रय लेना, भरोसा करना, ‘धैर्यमवलम्ब्’ धैर्य या साहस से काम लेना,–किं स्वातन्त्र्यमवलम्बसे–श० ५, माध्यस्थ्यमिष्टेऽप्यवलम्बतेऽर्थे– कु० १।५२, शि० २।१५,
आ–
1. आराम करना (किसी के सहारे) झुकना
2. लटकना, स्थगित होना –विक्रम० ५।२,
3. हथियाना, पकड़ना –अथालम्ब्य धनू रामः –भट्टि० ६।३५.१४।९५
4. पालनपोषण करना, थामना, उत्तरदायित्व लेना –आधोरणालम्बितं –रघु० १८।३९
5. निर्भर होना –तमालम्व्य रसोद्गमान् –सा० द० ६३
6. सहारा लेना, आसरा लेना, हाथ पकड़ना, धारण करना –अममेवार्थमालम्व्य न जिजीविषाम् –मुद्रा० २।२०, कि० १७।३४,
उद्–
खड़ा होना, सीधा खड़ा होना,–
“पादेनैकेन गगने द्वितीयेन च भूतले ।
तिष्ठाम्युल्लम्बितस्तावद्यावत्तिष्ठति भास्करः ॥”
– मृच्छ० २।१०
वि–
1. लटकाना, लटकना, स्थगित होना –रघु० १०।६२
2. अस्त होना, क्षीण होना (सूर्यादि का)
3. ठहरना, पिछड़ना, रह जाना –कु० ७।१३,
4. देर करना, मन्दगति होना –विलम्बितफलै: कालं निनाय स मनोरथैः –रघु० १।३३, किं विलम्व्यते त्वरितं तं प्रवेशय –उत्तर० १ ।



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