संस्कृत-शब्दकोशः

लल् लवङ्

लव

लवः [ल्+अप्]


1. उत्पाटन, उल्लुंचन
2. कटाई, (पके अनाज की) लावनी
3. अनुभाग, टुकड़ा, खण्ड, कवल या ग्रास
4. कण, बूँद, अल्पमात्रा, थोड़ा (इस अर्थ में प्रायः समास के अन्त में–जललवमुचः–मेघ० २०,७०, आचामति स्वेदलवान् मुखे ते–रघु० १३।२०, ६।५७, १६।६६, अश्रु० १५।९७, अमृत –कि० ५।४४, भ्रक्षेपलक्ष्मीलवक्रीते दास इव –गीत० ११, इसी प्रकार तृण°, अपराध°, ज्ञान°, सुख° धन° आदि
5. ऊन, पशम
6. क्रीडा
7. समय का सूक्ष्म विभाग (=एक निमेष का छठा भाग)
8. किसी भिन्न राशि अंश
9. (ज्योति० में) घात
10. हानि, विनाश
11. राम का एक पुत्र, यमल (जोड़वाँ) में से एक –दूसरे का नाम कुश था, लव का अपने भाई कुश के साथ वाल्मीकि मुनि के द्वारा पालनपोषण हुआ, सभास्थल आदि स्थानों में पाठ करने के लिए दोनों को महाकवि द्वारा रामायण की शिक्षा दी गई, (इस नाम की व्युत्पत्ति के लिये दे० रघु० १५।३२),
~वम्
1. लौंग,
2. जायफल,
~वम्
(अव्य०) कुछ, थोड़ा सा–लवमपि लवङ्गे न रमते–सरस्वती० १ ।


लवः [लू+अप्]


1. तोड़ना, काटना
2. खेती काटना, लावनी करना ।
समस्त पद
~इप्सु
(वि०) खेती काटने का इच्छुक ।

परिशिष्ट



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