संस्कृत-शब्दकोशः

लिङ्ख लिङ्गक

लिङ्ग

लिङ्ग
i (भ्वा० पर० लिङ्गति, लिङ्गित) जाना, हिलना–जुलना,
आ–
आलिङ्गन करना, परिरंभण करना ।
ii (चुरा० उभ० लिङ्गयति-ते) रङ्ग भरना, चित्रित करना
2. किसी संज्ञाशब्द की उसके लिङ्ग के अनुसार रूपरचना करना ।


लिङ्गम् [लिङ्ग् +अच्]


1. निशान, चिह्न, निशानी, प्ररूप, बिल्ला, प्रतीक, विभेदक चिह्न, लक्षण –यतिपार्थिवलिङ्गधारिणौ –रघु० ८।१६ मुनिर्दोहढलिङ्गदर्शी १४।७१, मनु० १।३०, ८।२५, २५२
2. अवास्तविक या मिथ्या चिह्न, वेश, छद्मवेश, धोखे में डालने वाला बिल्ला –लिङ्गैर्मुदः संवृतविक्रियास्ते –रघु० ७।३०, क्षपणकलिङ्गधारी – मुद्रा० १, न लिङ्गं धर्मकारणम् –हि० ४।८५, दे० नी लिङ्गिन्
3. लक्षण, रोग के चिह्न
4. प्रमाण के साधन, प्रमाण, सबूत साक्ष्य
5. (तर्क० में) किसी प्रतिज्ञा का विधेय
6. लिङ्गचिह्न
7. योनि –गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गम् न च वयः –उत्तर० ४।११
8. पुरुष की जननेन्द्रिय, शिश्न
9. (व्या० में) स्त्री या पुरुषवाची शब्द पहचानने का चिह्न, लिङ्ग
10. शिवलिङ्ग
11. देवमूर्ति, प्रतिमा
12. एक प्रकार का संबंध या अभिसूचक (जैसे कि संयोग, वियोग और साहचर्य आदि) जो किसी शब्द के किसी विशेष संदर्भ में अर्थ निश्चित करने का काम देता है – उदा० कुपितो मकरध्वजः में कुपित शब्द मकरध्वज शब्द के अर्थ का 'काम' के अर्थ में बंधेज कर देता है – काव्य० २, तथा तत्स्थानीय भाष्य
13. (वेदांत० में) सूक्ष्म शरीर, दृश्यमान स्थूल शरीर का अविनश्वर मूल शरीर, तु० पंचकोष ।
समस्त पद
~अग्रम्
लिङ्ग की मणि, सुपारी,
~अनुशासनम्
व्याकरण विषयक लिङ्ग ज्ञान, वे नियम जिनसे शब्द के लिङ्गों का ज्ञान मिलता है,
~अर्चनम्
शिव की लिङ्ग के रूप में पूजा,
~देहः, ~शरीरम्
सूक्ष्म शरीर–दे० लिङ्ग (१३) ऊपर,
~धारिन्
(वि०) बिल्लाधारी,
~नाशः
1. विशिष्ट चिह्नों का लोप
2. शिश्न का न रहना
3. दृष्टिशक्ति का अभाव, एक प्रकार का आँखों का रोग,
~परामर्शः
(तर्क० में) विचिह्न को ढूंढना या विचारना (उदा० 'अग्नि' का सूचक चिह्न 'धूआँ है),
~पुराणम्
अठारह पुराणों में से एक पुराण,
~प्रतिष्ठा
लिङ्ग' अर्थात् शिवजी की पिण्डी की स्थापना,
~वर्धन
(वि०) पुरुष की जननेन्द्रिय में उत्तेजना पैदा करने वाला,
~विपर्ययः
लिङ्गपरिवर्तन,
~वृत्तिः
(वि०) पाखंड से भरा हुआ,
~वृतिः
धर्म के कार्यों में पाखण्ड करने वाला,
~वेदी
वह आधार जिस पर शिवलिङ्ग स्थापित किया जाता है ।


लिङ्गम् [लिङ्ग+अच्]


1. चिह्न निशान
2. प्रतीक, विशिष्टता
3. रोग का लक्षण
4. शारीरिक सत्ता –– योगेन धृत्युद्यमसत्त्वयुक्तो लिङ्गं व्यपोहेत् कुशलोऽहमाख्यम् –भाग० ५।५।१३।
समस्त पद
~आयताः
वीर शैवों का संप्रदाय,
~पीठम्
'शिवलिङ्ग' मूर्ति जिस पर विराजमान है वह चौकी,
~शास्त्रम्
लिङ्ग ज्ञान पर व्याकरण का एक ग्रन्थ ।

परिशिष्ट



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