लीला [ली+क्विप् लियं लाति ला+क वा]
1. खेल, क्रीडा, विनोद, दिलबहलावा, आनन्द, मनोरंजन –क्लमं ययौ कन्दुकलीलयापि या –कु० ५।१९ (प्रायः समास के प्रथमखण्ड के रूप में प्रयुक्त) लीला कमलं, लीलाशुकः आदि
2. प्रीतिविषयक मनोविनोद, स्वेच्छाचारिता, रतिक्रीडा, केलिक्रीडा –उत्सृष्टलीलागतिः– रघु० ७।७, ४।२२, ५।७०, क्षुभ्यन्ति प्रसभमहो विनाऽपि हेतोर्लीलाभिः किमु सति कारणे रमण्य –शि० ८।२४, मेघ० ३५, (उज्ज्वलनीलमणि ने इस अर्थ में 'लीला' शब्द की व्याख्या इस प्रकार की है –
“अप्राप्तबल्लभसमागमनायिकायाः सख्याः पुरोऽत्र निजचित्तविनोदबुद्ध्या ।
आलापवेशगतिहास्य विलोकनाद्यैः प्राणेश्वरानुकृतिमाकलयन्ति लीलाम् ॥”
)
3. आसानी से, सुविधा, क्रीडामात्र, बच्चों का खेल –लीलया जघान 'आसानी से मार डाला'
4. दर्शन, आभास, हावभाव, छवि –यः संगतिं प्राप्तपिनाकिलील: –रघु० ६।७२, 'पिनाकी की भांति दिखलाई देने वाला'
5. सौन्दर्य, लावण्य, लालित्य –मुहुरवलोकित मण्डनलीला –गीत० ६, रघु० ६।१, १६।७१
6. बहाना, छद्मवेश, ढोंग, बनावट यथा लीलामनुष्यः, लीलानटः ।
समस्त पद
~अ(आ)गारः, –रम्, ~गृहम्, ~गेहम्, ~वेश्मन्
(नपुं०) आनन्दभवन – रघु० ८।९५,
~अङ्ग
(वि०) ललित अंगों वाला, ~अब्जम्, ~अम्बुजम्, ~अरविन्दम्, ~कमलम्, ~तामरसम्, ~पद्मम्
'कमल–खिलौना' कमल का फूल जो खिलौने की भांति हाथ में लिया हुआ हो –रघु० ६।१३, मेघ० ७५, कु० ६।८४,
~अवतारः
(विष्णु का) पृथ्वी पर मनोरंजन के लिए उतरना,
~उद्यानम्
1. प्रमोदवन
2. देववन, इन्द्र का स्वर्ग.
~कलहः
'क्रीडामय कलह' तु० प्रणय कलह,
~चतुर
(वि०) विशुद्ध मनोहर,
~मनुष्यः
कपटी मनुष्य, छद्मवेशी,
~मात्रम्
क्रीडामात्र, केवल खेल, बच्चों का खेल, अनायास,
~रतिः
(स्त्री०) मनोविनोद, क्रीडा,
~वापी
आनन्दबावडी,
~शुकः
आनन्द के लिए पाला हुआ तोता ।