लुप्
i (दिवा० पर० लुप्यति)
1. घबड़ा देना, विस्मित करना
2. विस्मित हो जाना या घबड़ा जाना ।
ii (तुदा० उभ० लुम्पति–ते, लुप्त)
1. तोड़ना, भंग करना, काट देना, नष्ट करना, क्षतिग्रस्त करना –अनुभवं वचसा सखि लम्पसि –नै० ४।१०५
2. अपहरण करना, वञ्चित करना, ठगना, लूटना
3. छीन लेना, झपट्टा मार लेना
4. लोप करना, दबा देना, ओझल करना –कर्मवा० (लुप्यते)
1. भंग होना, टूट जाना
2. लुप्त होना, नष्ट होना, ओझल या लोप होना, (व्या० में) प्रेर० (लोपयति-ते)
1. तोड़ना, भंग करना, उल्लंघन करना, अपकार करना
2. भूल जाना, उपेक्षा करना, वियुक्त करना – रघु० १२।९, इच्छा० (लुलुप्सति, लुलोपिषति) –यङन्त लोलुप्यते या लोलोप्ति;
अव–,प्र–
अपहरण करना, नष्ट करना
वि–
1. तोड़ देना, खींच कर भग्न कर देना, काट देना
2. छीन लेना, खसोटना, लूट लेना, उठा कर भाग जाना
3. बिगाड़ना
4. नष्ट करना, बर्बाद करना, ओझल करना –प्रियमत्यन्तविलुप्तदर्शनम् –कु० ४।२, 'सदा के लिए ओझल हो गया' उत्तर० ३।२८
5. पोंछ देना, मिटा देना ।
लुप् (व्या० में) लुप्त होना, मिटना, भूलचूक होना ।
परिशिष्ट