लेपः [लिप्+घञ्]
1. लीपना, पोतना, मालिश करना –याज्ञ० १।१८८
2. उबटन, मल्हम, अनुलेप
3. पलस्तर करना (सफ़ेदी करना या चूना पोतना)
4. हाथों की पोंछन
3. हाथों में चिपके भोजन का अवशेष) जब कि श्राद्ध में सबसे पहले तीन पुरुषों –पितृ, पितामह और प्रपितामह –को श्राद्ध में आहुतियाँ प्रस्तुत करने के पश्चात्; (प्रपितामह के पश्चात्; यह पोंछन तीन पूर्वपुरुषों को प्रस्तुत की जाती है अर्थात् चौथी पांचवीं और छठी पीढ़ी के पितृतुल्य पूर्वपुरुषों को) –लेपभाजश्चतुर्थाद्याः पित्राद्याः पिण्डभागिनः
5. धब्बा, दाग, दूषण, कालुष्य
6. नैतिक अपवित्रता, पाप
7. भोजन ।
समस्त पद
~करः
पलस्तर करने वाला, सफ़ेदी करने वाला, ईंट की चिनाई करने वाला,
~भागिन्, ~भुज्
(पुं०) चौथी, पांचवी और छठी पीढ़ी के पितृसंबंधी पूर्वपुरुष –मनु ४।२१६ ।