वत् (वि०) एक प्रत्यय जो 'स्वामित्व' की भावना को प्रकट करने के लिए 'संज्ञाशब्दों' के साथ लगाया जाता है –उदा० ‘धनवत्’–धनाढ्य, ‘रूपवत्’–सुन्दर, इसी प्रकार भगवत्, भास्वत् आदि, (इस प्रकार बने हुए शब्द विशेषण होते हैं)
2. भू० क० कृ० आधार से 'वत्' लगा कर कर्तृवा० का रूप बना लिया जाता है –इत्युक्तवन्तं जनकात्मजायाम् –रघु० १४।४३
3. अव्य० 'समानता' और 'सादृश्य' अर्थ को प्रकट करने के लिए संज्ञा या विशेषण शब्दों के साथ 'वत्' जोड़ दिया जाता है –उदा० आत्मवत्सर्वभूतानि यः पश्यति स पण्डितः ।
वत् ['मतुप्']
अधिकरण अर्थ में तथा 'योग्य' अर्थ में लगने वाला मत्वर्थीय प्रत्यय –मै० सं० १६।२ ।५१पर शा० भा०।
परिशिष्ट