वप् (भ्वा० उभ० वपति, वपते, उप्तः, कर्मवा० उप्यते, इच्छा० विवप्सति-ते)
1. बोना, (बीज) बिखेरना, पौधा लगाना – यथेरिणे बीजमुप्त्वा न वप्ता लभते फलम् –मनु० ३।१४२, न विद्यामिरिणे वपेत् –२।११३, यादृशं वपते बीजं तादृशं लभते फलम् – सुभा०, कु० २।५, श० ६।२३
2. फेंकना, (पांसा) डालना
3. जन्म देना, पैदा करना
4. बुनना
5. मूँडना, बाल काटना (प्रायः वैदिक),–प्रेर० – (वापयति–ते) बोना, पौधा लगाना, भूमि में डालना,
आ–
1. बिखेरना, इधर उधर फेंकना
2. बोना
3. यज्ञ आदि में आहुति देना
उद्–
उडेलना
नि–
1. ( बीज ) इधर–उधर बिखेरना
2. ( आहुति ) देना, विशेषतः पितरों को, –न्युप्य पिण्डांस्ततः – मनु० ३।२१६, (स्मरमुद्दिश्य) निवपेः सहकार मंजरी: –कु० ४।३८
3. बलि चढ़ाना, यज्ञ के पशु का वध करना
निस्–
1. बिखेरना, (बीज आदि) छितराना
2. प्रस्तुत करना, पेश करना –श्रोत्रियायाभ्यागताय वत्सतरीं वा महोक्षं वा निर्वपंति गृहमेधिनः –उत्तर० ४
3. तर्पण करना, विशेषकर पितरों का
4. अनुष्ठान करना
प्रति–
1. बोना
2. पौधा लगाना, जमाना, रोपना –उत्तर० ३।४६, मा० ५।१०
3. जमाना, (रत्नादिक) जड़ना,
प्र–
फेंकना डालना, प्रस्तुत करना –भट्टि० ९।९८ ।