संस्कृत-शब्दकोशः

वर्तिष्णु वर्तीर

वर्ती

वर्ती (स्त्री०) [वृत्+इन् वा ङीप्]


1. कोई भी लिपटी हुई गोल वस्तु, पत्राली, बही
2. उबटन, मल्हम, आंखों का लेप, काजल, अंगराग (गोली या टिकिया के रूप में)–सा पुनर्मम प्रथमदर्शनात्प्रभृत्यमृतवर्तिरिव चक्षुषोरानन्दमुत्पादयन्ती–मा० १, इयममृतवर्तिर्नयनयोः–उत्तर० १।३८, कर्पूरवर्तिरिव लोचनतापहंत्री–भामि० ३।१६, विद्ध० १
3. दीपक की बत्ती – मा० १०।४
4. (कपड़े की) झालर, फलवे, किनारी
5. जादू का लैंप
6. बर्तन के चारों ओर का उभार
7. जर्राही उपकरण (रम्भनाल आदि)
8. धारी, रेखा ।



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