संस्कृत-शब्दकोशः

वलूल वल्क

वल्

वल् (भ्वा० आ० वलते – परन्तु कभी कभी 'वलति' भी, वलित)
1. जाना, पहुंचना, जल्दी करना, अन्योऽन्यं शरवृष्टिरेव वलते महावी० ६।४१, प्रणयिनं परिरब्धुमथांगनां ववलिरे वलिरेचितमध्यमा: – शि० ६।३१, ६।११, १९।४२, त्वदभिसरणरभसेन वलंती पतति पदानि कियंति चलंति–गीत०६
2. हिलना जुलना, मुड़ना, घूम जाना–लितकंधर – मा० १।२९
3. मुड़ना आकृष्ट होना, अनुरक्त होना – हृदयमदये तस्मिन्नैवं पुनर्वलते बलात् गीत० ७, नलो० ३।५
4. बढ़ाना वलन्नूपुरनिस्वना सा० द० ११६, अमन्दं कन्दर्पज्वरजनितचिन्ताकुलतया वलद्बाधां राधां सरसमिदमूचे सहचरी–गीत० १
5.. ढकना, घेरना,
6. ढका जाना, घेरा जाना या घिर जाना,
वि–
इधर-उधर सरकना, इधर–उधर लुढ़कना स्विद्यति कृणति वेल्लति विवलति निमिषति विलोकयति तिर्यक् –काव्य० १०,
सम्–
मिलाना, गड़बड़ करना
2. संबद्ध करना, जोड़ना (बहुधा क्तान्त रूप दे० संवलित) ।



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