वस्
i (भ्वा० पर० वसति–कभी कभी–वसते, उषित)
1. रहना, बसना, निवास करना, ठहरना, डठे रहना, वास करना (प्रायः अधि० के साथ, परन्तु कभी कभी कर्म० के साथ) धीरसमीरे यमुनातीरे वसति वनमाली–गीत० ५
2. होना, विद्यमान होना, मौजूद होना, – वसन्ति हि प्रेम्णि गुणा न वस्तुनि कि० ८।३७, यत्राकृतिस्तत्र गुणा वसन्ति, भूतिः श्रीर्ह्रीर्धृतिः कीतिर्दक्षे वसति नालसे–सुभा०
3. वेग से चलना, (समय) बिताना (कर्म के साथ, प्रेर० बसाना, आवास देना, आबाद करना – इच्छा० (विवत्सति) रहने की इच्छा करना;
अधि–
(कर्म के साथ)
1. रहना, बसना, निवास करना, बस जाना यानि प्रियासहचरश्चिरमध्यवात्सम् उत्तर० ३।८, बाल्यात्परामिव दशां मदनोऽध्युवास–रघु० ५।६३, ११।६१, शि० ३।५९, मेघ० २५, भट्टि० १।३
2. उतरना, या अड्डे पर बैठना
अनु–
(कर्म० के साथ) निवास करना,
आ–
(कर्म० के साथ) निवास करना, बसना –रविमावसते सतां क्रियायै विक्रम० ३।७, मनु० ७।६९
2. कार्यवाही प्रारम्भ करना–मनु० ३।२
3. व्यय करना, (समय) बिताना
उप–
1. रहना, ठहरना (इस अर्थ में कर्म० के साथ)
2. उपवास रखना, अनशन करना–मनु० २।२२०, ५।२०, (आलं. से भी) उपोषिताभ्यामिव नेत्राभ्यां पिबन्ती–दश०,
नि–
1. रहना, निवास करना, ठहरना–अहो निवत्स्यति समं हरिणाङ्गनाभिः–श० १।२७, निवसिष्यसि मय्येव–भग० १२।८
2. मौजूद होना, विद्यमान होना,–पंच० १।३१
3. अधिकार करना, बसना. अधिकार में लेना,
निस्–
रह चुकना, अर्थात् (किसी विशेष काल) की समाप्ति तक जाना, प्रेर०निर्वासित करना, बाहर निकाल देना, देश निकाला देना, रघु० १४।६७,
परि–
1. निवास करना, ठहरना
2. रात बिताना–दे० पर्युषित,
प्र–
1. रहना, निवास करना
2.. विदेश जाना, यात्रा करना, घर से बाहर जाना, देशाटन करना –विधाय वृत्तिं भार्यायाः प्रवसेत्कार्यवान्नर:–मनु० ९।७४, रघ०१।१४, (प्रेर०) देशनिकाला देना, निर्वासित करना
प्रति–
निकट रहंना, पास में होना,
वि–
परदेश में रहना (प्रेर०) देश निकाला देना, निर्वासित करना भट्टि ० ४।३५,
विप्र–
देशाटन करना, घर से बाहर जाना–रघु० १२।११,
सम्–
1. रहना, निवास करना
2. साथ रहना, साहचर्य करना–मनु० ४।७९, याज्ञ० ३।१५ ।
ii (अदा० आ० वस्ते) पहनना, धारण करना–वसने परिधूसरे वसाना–श० ७।२१, शि० ९।७५, रघु० १२।८, कु० ३।५४, ७।९, भट्टि० ४।१०, प्रेर० (वासयति–ते) पहनवाना,
नि–
सुसज्जित करना –भट्टि० १५।७,
वि–
धारण करना, पहनना–भट्टि० ३।२० ।
ii (दिवा० पर० वस्यति)
1. सीधा होना
2. दृढ़ होना
3. स्थिर करना ।
iv (चुरा० उभ० वासयति-ते)
1. काटना, बाँटना, काट डालना
2. रहना
3. लेना, स्वीकार करना
4. चोट पहुँचाना, हत्या करना ।
1. (चुरा० उभ० वसयति-ते) सुगन्धित करना, सुवासित करना ।