वस्तु (नपुं०) [वस्+तुन्]
1. वस्तुत. विद्यमान चीज, वास्तविक, वास्तविकता वस्तून्यवस्त्वारोपोऽज्ञानम्
2. चीज, पदार्थ, सामग्री, द्रव्य, मामला–अथवा मृदु वस्तु हिंसितुं मृदुनैवारभते कृतांतक: –रघु० ८।४५, किं वस्तु विद्वन् गुरवे प्रदेयम् – ५।१८, ३।५, वस्तुनीष्टेप्यनादरः–सा० द.3.धनदौलत, सम्पत्ति. वैभव
4. सत, प्रकृति, नैसर्गिक या प्रधान गुण
5 सामान (जिससे कोई वस्तु बन सके), सामग्री, मूलपदार्थ (आलं० से भी) आकृतिप्रत्ययादेवनामनूनवस्तुकां संभावयामि – मालवि० १
6. (नाटक की) कथावस्तु, किसी काव्यकृति की विषयवस्तु, –कालिदासप्रथितवस्तुना नवेनाभिज्ञानशकुंतलाख्येन नाटकेनोपस्थातव्यमस्माभि:– श० १, अथवा सद्वस्तु पुरुषबहुमानात्– विक्रम० १।२, आशीर्नमस्क्रिया वस्तूनिर्देशो वापि तन्मुखम् –सा० द० ६, वेणी० १
7. किसी वस्तु का गूदा
8. योजना, रूपरेखा ।
समस्त पद
~अभावः
1. वास्तविकता की कमी
2. सम्पत्ति की हानि,
~उत्थापनम्
ओझाई या झाड़फूंक अथवा अभिचार के द्वारा (नाटकों में) किसी उपख्यान की रचना –सा०द० ४२०,
~उपमा
दण्डी के अनुसार उपमा का एक भेद, दण्डी द्वारा निरूपित लक्षण –
“राजीवमिव ते वक्त्रं नेत्रे नीलोत्पले इव ।
इयं प्रतीयमानैकधर्मा वस्तूपमैव सा ॥”
– काव्या० २।१६, (यह एक ऐसी उपमा की बात है जहाँ साधारण धर्म का लोप हो गया है),
~उपहित
(वि०) उपयुक्त पदार्थ के साथ व्यवहृत, उपयुक्त सामग्री पर अर्पित – रघु० ३।२९,
~मात्रम्
किसी विषय की केवल रूपरेखा या ढांचा (जिसे बाद में विकसित किया जा सके) ।
वस्तु (नपुं०) [वस्+तुन्]
1. वास्तविकता
2. चीज
3. धन–धान्य
4. सामग्री (जिससे कोई वस्तु बनाई जाय
5. अभिकल्पना, योजना ।
समस्त पद
~क्षणात्
(अ०) ठीक समय पर, तन्त्र (वि०) वस्तुनिष्ठ, विषयपरक,
~निर्देशः
1. विषय सूची
2. एक प्रकार की नान्दी,
~पुरुषः
नायक–अथवा सद्वस्तु पुरुष बहुमानात् विक्रम० १।२,
~भावः
वास्तविकता,
~भूत
(वि०) सारयुक्त, तथ्यपूर्ण, यथार्थ,
~विनिमयः
अदल–बदल का व्यापार,
~शक्तिस्
(अ०) परिस्थितियों के कारण,
~शून्य
(वि०) अवास्तविक,
~स्थिति
वास्तविकता ।
परिशिष्ट