वह् (भ्वा० उभ० वहति ते, ऊढ, कर्म० उह्यते)
1. ले जाना, नेतृत्व करना, धारण करना, वहन करना, परिवहन करना, (प्रायः दो कर्म के साथ)– अजा ग्रामं वहति, वहति विधिहुतं या हविः– श० १।१, न च हव्यं वहत्यग्निः – मनु० ४।२४०
2. ढोना, आगे चलाना, बहा कर ले जाना. धकेलना–जलानि या तीरखातयूपा वहत्ययोध्यामनु राजधानीम्– रघु० १३।६१, त्रिस्रोतसं वहति यो गगनप्रतिष्ठाम्– श० ७७, रघु० ११।१०
3. जाकर लाना, ले आना –वहति जलमियम्– मुद्रा०१४
4. धारण करना, सहारा देना, थाम लेना, जीवित रहना–न गर्दभा वाजिधुरं वहंति मृच्छ० ४।१७, ताते चापद्वितीये वहति रणधुरां को भयस्यावकाशः– वेणी० ३।५, 'जब मेरे पिता हरावल का नेतृत्व कर रहे हैं, वहति भुवनश्रेणीं शेष: फणाफलकस्थिताम्– भर्तृ० २।३५, श० ७।१७, मेघ०१७
5. उठाकर ले जाना, अपहर करना –अद्रेः शृंगं वहति (पाठांतर–'हरति') पवनः किं स्विद्–मेघ० १४
6. विवाह करना यदूढया वारणराजहार्यया–कु० ५।७०, मनु० ३।३८
7.रखना, अधिकार में करना, भारवहन करना–वहसि हि धनहार्यं पण्यभूतं शरीरम्–मृच्छ० १।३१, वहति विषधरान् पटीरजन्मा भामि० १।७४
8. धारण करना, प्रदर्शित करना, दिखाना–लक्ष्मीमुवाह सकलस्य शशांकमूर्तेः–कि० ५।९२, ९।२
9. मुंह ताकना, सेवा करना, देखभाल करना– मुग्धाया में जनन्या योगक्षेमं वहस्व–मालवि०४. तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्–भग० ९।२२
10. भुगतना, टटोलना, अनभव करना, भामि० १।९४, इसी प्रकार –दुःखं, हर्षं, शोकं तोषं आदि
11. (इस अर्थ मे तथा निम्नांकित अर्थों में अकर्मक) धारण किया जाना ले जाया जाना, चलते रहना, वहतं बलीवर्दो वहतम् –मृच्छ०६, उत्थाय पूनरवहत्– का०, पंच०१।४३, २९१
12 (नदी आदि का) बहना–प्रत्यगूहुमहानद्यः – महा०, परोपकाराय वहंति नद्यः–सुभा०
13.( हवा का) चलना, मंदं वहति मारुतः– राम०, वहति मलयसमीरे मदनमुपनिधाय गीत० ५, प्रेर० (वाहयति-ते)
1. धारण कराना, भिजवाना, मंगवाना, ले जाया जाना
2. हाँकना, ठेलना, निदेश देना
3.आर पार जाना, पारगमन करना.सवाह्यते राजपथः शिवाभिः – रघु० १६।१२, भवान् वाहयेदध्वशेषम् –मेघ० ३८
4. उपयोग करना, ले जाना–भट्टि० १४।२३, इच्छा० (विवक्षति-ते) ले जाने की इच्छा करना,
अति–
गुजारना, (समय) बिताना, मुख्य रूप से प्रेर०, मा० ६।१३, रघु० ९।७०,
अप–
1. हाँक कर दूर भगा देना, हटाना, दूर ले जाना रघु० १३।२२, १६।६.
2. छोड़ना, त्यागना, तिलांजलि देना –रघु०११।२५
3. घटाना, व्यवकलन करना,
आ–
1. पूरी तरह समझा देना
2. जन्म देना, पैदा करना प्रवृत्त होना या झुकना–व्रीडमावहति मे स संप्रति रघ० ११।७३, श० ३।४
3. वहन करना, कब्जे में करना, रखना–चौर० १८
4. बहना
5. प्रयोग करना, उपयोग करना (प्रेर०) (देवता का) आवाहन करना,
उद्–
1. विवाह करना–पार्थिवीमुदवहद्रघूद्वहः– रघु० ११।५४, मनु० ३।८, भट्टि० २।४८
2. ऊपर उठाना, उन्नत होना
3. संभालना, जीवित रखना, ऊँचे उठाना, सहारा देना–रघु० १६।६०
4. भुगतना, अनुभव करना
5. अधिकार में करना, रखना, पहनना, धारण करना,–कु० १।१९, विक्रम ४।४२
6. समाप्त करना, पूरा करना,
उप–
1. निकट लाना
2. उपक्रम करना, आरम्भ करना,
नि–
संभाले रखना, जीवित रखना, सहारा देना, वेदानुद्धरते जगन्निवहते –गीत०१,
निस्–
1. समाप्त होना
2. अवलंबित होना, की सहायता से निर्वाह करना, (प्रेर०) –समाप्ति तक ले जाना, पूरा करना, समाप्त करना, प्रबंध करना–श० ३,
परि–
छलकना,
प्र–
वहन करना, ले जाना, खींचते रहना
2. वहा ले जाना, ले जाना, वहन करते जाना–भट्टि० ८।५२
3. सहारा देना, (भार) वहन करना,
4. बहना
5. खिलना
6. रखना, अधिकार में करना, स्पर्श करना या महसूस करना,
वि–
विवाह करना,
सम्–
1. ले जाना, धारण किये जाना
2. मसलना, दबाना, दे०प्रेर.3. विवाह करना, दिखाना, प्रदर्शित करना, प्रस्तुत करना, (प्रेर०) मसलना, या मालिश करना श० ३।२१।
वंह् (चुरा० उभ० वंहयति-ते) उज्ज्वल करना, चमकाना, रोशनी करना ।
वंह् दे० बंह् ।