संस्कृत-शब्दकोशः

वाच् वाज

वाच्य

वाच्य (वि) [वच् +कर्मणि ण्यत्]


1. कहे जाने या बत लाये जाने के योग्य, संबोधित किये जाने योग्य–वाच्यस्त्वया मद्वचनात्स राजा–रघ०१४।६१, 'मेरी ओर से राजा को कहिए"
2. अभिधानीय, गुणवाचक, विशेषक
3. अभिव्यक्त (शब्दार्थ आदि) तु० लक्ष्य व्यंग
4. दूषणीय, निन्दनीय, डांटने–फटकारने योग्य –शि० २०।६४, हि० ३।१२९,
~च्यम्
1. कलंक, निन्दा, झिड़की–प्रमदामनु संस्थितः शुचा नृपतिः सन्नितिः वाच्यदर्शनात्– रघु० ८।७२, ८४, चिरस्य वाच्यं न गतः प्रजापतिः–श० ५।१५, शि० ३।५८
2. अभिव्यक्त अर्थ जो अभिधा द्वारा ज्ञात हों, तु० लक्ष्य, व्यंग्य: अपि तु वाच्यवैचित्र्यप्रतिभासादेव चारुताप्रतीतिः–काव्य० १०
3. विधेय
4. क्रिया की वाच्यता (कर्मवाच्य या भाववाच्य) ।
समस्त पद
~अर्थः
अभिव्यक्त अर्थ,
~चित्रम्
अधम काव्य के दो भदों में से एक, इसमें काव्य सौन्दर्य चमत्कार युक्त तथा उद्धावना युक्त विचारों की अभिव्यंजना में निहित है (विप० शब्द चित्र), दे० 'चित्र' भी,
~वज्रम्
कठोर और कर्कश भाषा ।


वाच्य (वि०) [वच्+ण्यत्]


1. कहे जाने योग्य
2. अभिधाद्वारा प्रकट अर्थ
3. निन्दनीय ।
समस्त पद
~लिङ्ग
(वि०) विशेषणपरक,
~वर्जितम्
कूटोक्ति, अभिधा शक्ति के द्वारा दुर्बोध उक्ति,
~वाचकभावः
शब्द और अर्थ की स्थिति ।

परिशिष्ट



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