वाजिन् (पुं०) [वाज+इनि]
1. घोड़ा–न गर्दभा धुरं वहन्ति–मृच्छ० ४।१७, रघु० ३।४३, ४।२५, ६७, शि०१८।३१
2. बाण
3. पक्षी
4. यजुर्वेद की वाजसनेयिशाखा का अनुयायी ।
समस्त पद
~पृष्ठः
गोल सदाबहार,
~भक्षः
छोटी मटर,
~भोजनः
एक का लोबिया,
~मेधः
अश्वमेध यज्ञ,
~शाला
अस्तबल, घुड़शाला ।
वाजिन् (वि०) [वाज+इनि]
1. पक्षी प्राणिवाजिनिषेविताम् – महा० ७।१४।१६
2. सात की संख्या ।
समस्त पद
~गन्धः
एक वृक्ष का नाम,
~विष्ठा
बड़ का वृक्ष, गूलर ।
परिशिष्ट