वासव (वि०) (स्त्री० –‘वी’) [वसुरेव स्वार्थे अण्, वसूनि सन्त्यस्य अण् वा]
इन्द्र सम्बन्धी – पांडुतां वासवी दिगयासीत्–का०, वासवीनां चमनाम् – मेघ० ४३,
~वः
इन्द्र का नाम–कू०३।२, रघु० ५।५।
समस्त पद
~दत्ता
1. सूबन्धु की एक रचना
2. कई कहानियों में वर्णित नायिका (इस स्त्री) का वर्णन भिन्न–भिन्न कवि विविध प्रकार से करते हैं । 'कथासरित्सागर’ के अनुसार वह उज्जयिनी के महाराजा चण्डमहासेन की पुत्री थी जिसका अपहरण वत्स के राजा उदयन ने किया था । श्रीहर्ष उसे प्रद्योत राजा की पुत्री बतलाते हैं (दे० रत्न० १।१०) और मल्लि० की टीका के अनुसार–प्रद्योतस्य प्रियदुहितरं वत्सराजोऽत्र जह्रे –वह उज्जयिनी के राजा प्रद्योत की पुत्री थी । भवभूति कहते हैं कि उसके पिता ने उसकी सगाई राजा संजय के साथ की थी, परन्तु उसने अपन आपको उदयन की सेवा में अर्पित किया (दे० मा २) । परन्तु सुबन्धु की वासवदत्ता की वत्स की कहानी से कोई समानता नहीं । हाँ, उसका नाम अवश्य एक ही था । भवभूति के अनुसार उसके पिता ने उसकी सगाई पूष्पकेतु के साथ की थी, परन्तु कंदर्पकेतु उसे अपहृत कर ले गया । यह संभव है कि 'वासवदत्ता' नाम की कई नायिकाएँ हों) ।